शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

लंका से हनुमान जी को शुमेरू परबत से संजीवनी बूटी को लेकर आने कितना समय लगा

#हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी थी 
#जानिए हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी रही होगी उसका अंदाजा आप लगा सकते हैं की रात्रि को 9:00 बजे से लेकर 12:00 बजे तक #लक्ष्मण जी एवं #मेघनाद का युद्ध हुआ था। मेघनाद द्वारा चलाए गए बाण से#लक्ष्मण जी को शक्ति लगी थी लगभग रात को 12:00 बजे के करीब  और वो #मूर्छित हो गए थे।

#रामजी को लक्ष्मण जी मूर्छा की जानकारी मिलना फिर दुखी होने के बाद चर्चा जे उपरांत हनुमान जी & विभीषणजी के कहने से #सुषेण वैद्य को #लंका से लेकर आए होंगे 1 घंटे में अर्थात 1:00 बजे के करीबन।

सुषेण वैद्य ने जांच करके बताया होगा कि #हिमालय के पास #द्रोणागिरी पर्वत पर यह चार #औषधियां मिलेगी जिन्हें उन्हें #सूर्योदय से पूर्व 5:00 बजे से पहले लेकर आना था ।इसके लिए #रात्रि को 1:30 बजे हनुमान जी हिमालय के लिए रवाना हुए होंगे।

हनुमानजी को ढाई हजार किलोमीटर दूर हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत से उस औषधि को लेकर आने के लिए  3:30 घंटे का समय मिला था। इसमें भी उनका आधे घंटे का समय औषधि खोजने में लगा होगा ।आधे घंटे का समय #कालनेमि नामक राक्षस ने जो उनको भ्रमित किया उसमें लगा होगा एवं आधे घंटे का समय #भरत जी के द्वारा उनको नीचे गिराने में तथा वापस भेजने देने में लगा होगा।अर्थात आने जाने के लिये मात्र दो घण्टे का समय मिला था।

मात्र  दो  घंटे में हनुमान जी द्रोणगिरी पर्वत हिमालय पर जाकर वापस 5000 किलोमीटर की यात्रा करके आये थे, अर्थात उनकी गति ढाई हजार किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी।

आज का नवीनतम #मिराज #वायुयान  की गति 2400 किलोमीटर प्रति घंटा है ,तो हनुमान जी महाराज उससे भी तीव्र गति से जाकर मार्ग के तीन-तीन अवरोधों को दूर करके वापस सूर्योदय से पहले आए ।यह उनकी विलक्षण #शक्तियों के कारण संभव हुआ था।
बोलिए हनुमान जी महाराज की जय
#पवनसुत हनुमान की जय 
#सियावर रामचंद्र जी की जय
🙏🙏जय श्री राम जय हनुमान 
आप का तिवारी परिवार जय हिंद 

संगत का असर इस तरह होता है

(((( संगत का प्रभाव ))))
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एक राजा का तोता मर गया। उन्होंने कहा-- मंत्रीप्रवर! हमारा पिंजरा सूना हो गया। इसमें पालने के लिए एक तोता लाओ।
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तोते सदैव तो मिलते नहीं। राजा पीछे पड़ गये तो मंत्री एक संत के पास गये और कहा-- भगवन्! राजा साहब एक तोता लाने की जिद कर रहे हैं। आप अपना तोता दे दें तो बड़ी कृपा होगी। संत ने कहा- ठीक है, ले जाओ।
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राजा ने सोने के पिंजरे में बड़े स्नेह से तोते की सुख-सुविधा का प्रबन्ध किया।
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ब्रह्ममुहूर्त में तोता बोलने लगा--  जय श्री राम ,,,   ओम् तत्सत्....ओम् तत्सत् ... उठो राजा! उठो महारानी! दुर्लभ मानव-तन मिला है। यह सोने के लिए नहीं, भजन करने के लिए मिला है।
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'चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर। तुलसीदास चंदन घिसै तिलक देत रघुबीर।।'
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कभी रामायण की चौपाई तो कभी गीता के श्लोक उसके मुँह से निकलते। पूरा राजपरिवार बड़े सवेरे उठकर उसकी बातें सुना करता था। राजा कहते थे कि सुग्गा क्या मिला, एक संत मिल गये।
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हर जीव की एक निश्चित आयु होती है। एक दिन वह सुग्गा मर गया। राजा, रानी, राजपरिवार और पूरे राष्ट्र ने हफ़्तों शोक मनाया। झण्डा झुका दिया गया।
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किसी प्रकार राजपरिवार ने शोक संवरण किया और राजकाज में लग गये। पुनः राजा साहब ने कहा-- मंत्रीवर ! खाली पिंजरा सूना-सूना लगता है, एक तोते की व्यवस्था हो जाती!
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मंत्री ने इधर-उधर देखा, एक कसाई के यहाँ वैसा ही तोता एक पिंजरे में टँगा था। मंत्री ने कहा कि इसे राजा साहब चाहते हैं।
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कसाई ने कहा कि आपके राज्य में ही तो हम रहते हैं। हम नहीं देंगे तब भी आप उठा ही ले जायेंगे।
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मंत्री ने कहा-- नहीं, हम तो प्रार्थना करेंगे।
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कसाई ने बताया कि किसी बहेलिये ने एक वृक्ष से दो सुग्गे पकड़े थे। एक को उसने महात्माजी को दे दिया था और दूसरा मैंने खरीद लिया था। राजा को चाहिये तो आप ले जायँ।
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अब कसाईवाला तोता राजा के पिंजरे में पहुँच गया।
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राजपरिवार बहुत प्रसन्न हुआ। सबको लगा कि वही तोता जीवित होकर चला आया है।
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दोनों की नासिका, पंख, आकार, चितवन सब एक जैसे थे। लेकिन बड़े सवेरे तोता उसी प्रकार राजा को बुलाने लगा जैसे वह कसाई अपने नौकरों को उठाता था कि..
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उठ ! हरामी के बच्चे! राजा बन बैठा है। मेरे लिए ला अण्डे, नहीं तो पड़ेंगे डण्डे!
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राजा को इतना क्रोध आया कि उसने तोते को पिंजरे से निकाला और गर्दन मरोड़कर किले से बाहर फेंक दिया।
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दोनों सुग्गे, सगे भाई थे। एक की गर्दन मरोड़ दी गयी, तो दूसरे के लिए झण्डे झुक गये, भण्डारा किया गया, शोक मनाया गया।
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आखिर भूल कहाँ हो गयी ? अन्तर था तो संगति का ! सत्संग की कमी थी।
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'संगत ही गुण होत है, संगत ही गुण जाय।
बाँस फाँस अरु मीसरी, एकै भाव बिकाय।।'
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सत्य क्या है और असत्य क्या है ? उस सत्य की संगति कैसे करें ?
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पूरा सद्गुरु ना मिला, मिली न साँची सीख।
भेष जती का बनाय के, घर-घर माँगे भीख।

****जय श्री राम , जय महावीर हनुमान ****
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मनुष्य योनि का महत्व ,,,,,,,,

*नर तन सम नहिं कवनिउ देही। जीव चराचर जाचत तेही॥
नरक स्वर्ग अपबर्ग निसेनी। ग्यान बिराग भगति सुभ देनी॥
भावार्थ:-मनुष्य शरीर के समान कोई शरीर नहीं है। चर-अचर सभी जीव उसकी याचना करते हैं। वह मनुष्य शरीर नरक, स्वर्ग और मोक्ष की सीढ़ी है तथा कल्याणकारी ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को देने वाला है॥
* सो तनु धरि हरि भजहिं न जे नर। होहिं बिषय रत मंद मंद तर॥
काँच किरिच बदलें ते लेहीं। कर ते डारि परस मनि देहीं॥

भावार्थ:-ऐसे मनुष्य शरीर को धारण (प्राप्त) करके भी जो लोग श्री हरि का भजन नहीं करते और नीच से भी नीच विषयों में अनुरक्त रहते हैं, वे पारसमणि को हाथ से फेंक देते हैं और बदले में काँच के टुकड़े ले लेते हैं॥
 
आप का तिवारी परिवार 

बीवाह और अगीनी

💞विवाह में सात फेरे या💞👣 #सप्तपदी 👣ही क्यों लेते हैं❓

🔸आखिर हिन्दू विवाह के समय🔥 अग्नि के समक्ष सात फेरे ही क्यों लेते हैं❓ दूसरा यह कि क्या फेरे लेना जरूरी है❓

🔸पाणिग्रहण का अर्थ :💟-पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से 'विवाह' के नाम से जाना जाता है❗वर द्वारा नियम और वचन स्वीकारोक्ति के बाद कन्या अपना हाथ वर के हाथ में सौंपे और वर अपना हाथ कन्या के हाथ में सौंप दे❗इस प्रकार दोनों एक-दूसरे का #पाणिग्रहण करते हैं। कालांतर में इस रस्म को '#कन्यादान' कहा जाने लगा, जो कि अनुचित है❗
 
🔸नीचे लिखे मंत्र के साथ कन्या अपना हाथ वर की ओर बढ़ाए, वर उसे अंगूठा सहित (समग्र रूप से) पकड़ ले। भावना करें कि दिव्य वातावरण में परस्पर मित्रता के भाव सहित एक-दूसरे के उत्तरदायित्व को स्वीकार कर रहे हैं❗
 
🚩🙏ॐ यदैषि मनसा दूरं, दिशोऽ नुपवमानो वा❗
हिरण्यपणोर् वै कर्ण, स त्वा मन्मनसां करोतु असौ❗ -पार.गृ.सू. 1.4.15
 
🔸विवाह का अर्थ : - विवाह को 💟##शादीयामैरिज कहना गलत है❗ विवाह का कोई समानार्थी शब्द नहीं है❗विवाह= वि+वाह,🥰 अत: इसका शाब्दिक अर्थ है- विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना❗
 
🔸विवाह एक संस्कार : 💟 अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, लेकिन हिन्दू धर्म में विवाह बहुत ही भली-भांति सोच- समझकर किए जाने वाला संस्कार है। इस संस्कार में वर और वधू सहित सभी पक्षों की सहमति लिए जाने की प्रथा है❗ हिन्दू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीरिक संबंध से अधिक 🤗आत्मिक संबंध होता है और इस संबंध को अत्यंत पवित्र🌼 माना गया है❗
 
🔸सात फेरे या सप्तपदी :  💟 हिन्दू धर्म में 16 संस्कारों को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। विवाह में जब तक 7 फेरे नहीं हो जाते, तब तक विवाह संस्कार पूर्ण नहीं माना जाता। न एक फेरा कम, न एक ज्यादा❗ इसी प्रक्रिया में दोनों 7 फेरे लेते हैं जिसे '#सप्तपदी' भी कहा जाता है❗ये सातों फेरे या पद 7 वचन के साथ लिए जाते हैं। हर फेरे का एक वचन होता है जिसे पति-पत्नी जीवनभर साथ निभाने का वादा करते हैं❗ ये 7 फेरे ही हिन्दू विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होते हैं🔥 अग्नि के 7 फेरे लेकर और ध्रुव तारे को साक्षी मानकर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं❗
 
💞सात अंक का महत्व...💞
 
🤔ध्यान देने योग्य बात है कि भारतीय संस्कृति में 7 की संख्या मानव जीवन के लिए बहुत विशिष्ट मानी गई है। संगीत के 7 सुर, इंद्रधनुष के 7 रंग, 7 ग्रह, 7 तल, 7 समुद्र, 7 ऋषि, सप्त लोक, 7 चक्र, सूर्य के 7 घोड़े, सप्त रश्मि, सप्त धातु, सप्त पुरी, 7 तारे, सप्त द्वीप, 7 दिन, मंदिर या मूर्ति की 7 परिक्रमा, आदि का उल्लेख किया जाता रहा है❗
 
🔸उसी तरह जीवन की 7 क्रियाएं अर्थात-शौच, दंत धावन, स्नान, ध्यान, भोजन, वार्ता और शयन❗7 तरह के 🔸अभिवादन अर्थात- माता, पिता, गुरु, ईश्वर, सूर्य, अग्नि और अतिथि❗ सुबह सवेरे 7 पदार्थों के दर्शन- गोरोचन, चंदन, स्वर्ण, शंख, मृदंग, दर्पण और मणि। 7 आंतरिक अशुद्धियां- ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, लोभ, मोह, घृणा और कुविचार। उक्त 🔸अशुद्धियों को हटाने से मिलते हैं ये 7 विशिष्ट लाभ- जीवन में सुख, शांति, भय का नाश, विष से रक्षा, ज्ञान, बल और विवेक की वृद्धि❗

🔸स्नान के 7 प्रकार- मंत्र स्नान, मौन स्नान, अग्नि स्नान, वायव्य स्नान, दिव्य स्नान, मसग स्नान और मानसिक स्नान। शरीर में 7 धातुएं हैं- रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मजा और शुक्र। 7 गुण- विश्वास, आशा, दान, निग्रह, धैर्य, न्याय, त्याग। 7 पाप- अभिमान, लोभ, क्रोध, वासना, ईर्ष्या, आलस्य, अति भोजन और 7 उपहार- आत्मा के विवेक, प्रज्ञा, भक्ति, ज्ञान, शक्ति, ईश्वर का भय❗
 
🔸यही सभी ध्यान रखते हुए अग्नि के 7 फेरे लेने का प्रचलन भी है जिसे 'सप्तपदी' कहा गया है। वैदिक और पौराणिक मान्यता में भी 7 अंक को पूर्ण माना गया है। कहते हैं कि पहले 4 फेरों का प्रचलन था। मान्यता अनुसार ये जीवन के 4 पड़ाव- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक था❗
 
🔸हमारे शरीर में ऊर्जा के 7 केंद्र हैं जिन्हें 'चक्र' कहा जाता है❗ ये 7 चक्र हैं- मूलाधार (शरीर के प्रारंभिक बिंदु पर), स्वाधिष्ठान (गुदास्थान से कुछ ऊपर), मणिपुर (नाभि केंद्र), अनाहत (हृदय), विशुद्ध (कंठ), आज्ञा (ललाट, दोनों नेत्रों के मध्य में) और सहस्रार (शीर्ष भाग में जहां शिखा केंद्र) है❗
 
🔸उक्त 7 चक्रों से जुड़े हैं हमारे 7 शरीर। ये 7 शरीर हैं- स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर, कारण शरीर, मानस शरीर, आत्मिक शरीर, दिव्य शरीर और ब्रह्म शरीर❗
 
💟विवाह की सप्तपदी में उन शक्ति केंद्रों और अस्तित्व की परतों या शरीर के गहनतम रूपों तक तादात्म्य बिठाने करने का विधान रचा जाता है। विवाह करने वाले दोनों ही वर और वधू को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से एक-दूसरे के प्रति समर्पण और विश्वास का भाव निर्मित किया जाता है❗
 
🔸मनोवैज्ञानिक तौर से दोनों को ईश्वर की शपथ के साथ जीवनपर्यंत तक दोनों से साथ निभाने का वचन लिया जाता है इसलिए विवाह की सप्तपदी में 7 वचनों का भी महत्व है❗
 
🔸सप्तपदी में पहला पग भोजन व्यवस्था के लिए, दूसरा शक्ति संचय, आहार तथा संयम के लिए, तीसरा धन की प्रबंध व्यवस्था हेतु, चौथा आत्मिक सुख के लिए, पांचवां पशुधन संपदा हेतु, छठा सभी ऋतुओं में उचित रहन-सहन के लिए तथा अंतिम 7वें पग में कन्या अपने पति का अनुगमन करते हुए सदैव साथ चलने का वचन लेती है तथा सहर्ष🥰 जीवनपर्यंत पति के प्रत्येक कार्य में सहयोग देने की प्रतिज्ञा करती है❗
 
🔸मैत्री सप्तपदीन मुच्यते'💞 अर्थात एकसाथ सिर्फ 7 कदम चलने मात्र से ही दो अनजान व्यक्तियों में भी मैत्री भाव उत्पन्न हो जाता है अतः जीवनभर का संग निभाने के लिए प्रारंभिक 7 पदों की गरिमा एवं प्रधानता को स्वीकार किया गया है। 7वें पग में वर, कन्या से कहता है कि 'हम दोनों 7 पद चलने के पश्चात परस्पर सखा बन गए हैं❗
 
💞मन, वचन और कर्म के प्रत्येक तल पर पति-पत्नी के रूप में हमारा हर कदम एकसाथ उठे इसलिए आज अग्निदेव के समक्ष हम साथ-साथ 7 कदम रखते हैं। हम अपने गृहस्थ धर्म का जीवनपर्यंत पालन करते हुए एक-दूसरे के प्रति सदैव एकनिष्ठ रहें और पति-पत्नी के रूप में जीवनपर्यंत हमारा यह बंधन अटूट बना रहे तथा हमारा प्यार 7 समुद्रों की भांति विशाल और गहरा हो❗🚩🔱#जयगौरीशंकर 🌹💞🙏👣💞🌹👣
 
संकलन : पुराण आदि हिन्दू ग्रंथों से🚩🚩

आप। का। तिवारी  परीवार
जय श्री राम
जय श्री राधे राधे 

कुछ कहे या ना कहें कुछ समझ में नहीं आता इन राजनेताओं को

जब वैक्सीन बन चुकी थी ....तब एक साजिश के तहत मुसलमानों और तमाम मुस्लिम मौलाना मौलवियों ने... यह सवाल उठाने खड़े कर दिए कि ....जब तक वैक्सीन पर हलाल सर्टिफिकेट नहीं लगेगा ...तब तक हम वैक्सिंन नहीं लगाएंगे ।
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 महीनों तक मुस्लिम समुदाय वैक्सीन ...हलाल है कि हराम है ....इस पर बहस करता रहा ...
यहां तक कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पढ़े-लिखे प्रोफेसर ने भी यह सोचकर वैक्सीन नहीं लगवाया यह इस पर हलाल सर्टिफिकेट नहीं है ।
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कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने वैक्सीन पर यह कहा कि ...नरेंद्र मोदी भारतीयों को गिनी पिग बना रहे हैं ...

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री ने यहां तक कह दिया कि  ....वह अपने यहां कोबिशिल्ड को मंजूरी नहीं देंगे ...क्योंकि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है ।
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 टीवी एंकर और News24 के पत्रकार ने खुलेआम भारतीय वैक्सीन पर सवाल उठाते हुए बीजेपी प्रवक्ता के साथ बहस में कहा .....आप बीजेपी वाले हैं ...आपको भारत में बनी वैक्सीन पर भरोसा है ....आप वैक्सीन लगवाईये ....मैं तो बिल्कुल  नहीं लगवाउंगा  ...क्योंकि मुझे वैक्सीन पर बिल्कुल भरोसा नही है ।
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आम आदमी पार्टी के आईटी सेल संयोजक ....अंकित लाल ने वैक्सीन पर सवाल उठाते हुए तमाम ट्वीट किए...

राघव चड्ढा ने एक ट्वीट में कहा कि आखिर मोदी को वैक्सीन की इतनी जल्दी क्या है ....

कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन ने ...ट्विटर पर वैक्सीन का बेहद घटिया मजाक बनाया ....और भारत की वैक्सीन को खुलेआम फर्जी वैक्सीन कहा...
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वामपंथी  कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य ने ....भारत की वैक्सीन का बेहद अभद्र कार्टून बनाया ...उस कार्टून के अनुसार भारत की वैक्सीन पानी और ग्लूकोस का मिश्रण भर है ...
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समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ....प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ....उन्हें वैक्सीन पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है ...यह तो बीजेपी की वैक्सीन है ...मैं बीजेपी की वैक्सीन कभी नहीं लगाऊंगा 
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 इतने बड़े पैमाने पर वैक्सीन  के प्रति नकारात्मकता फैलाया  गया ...  

 और इस नकारात्मक प्रचार की वजह से.... लोगों के मन में ...वैक्सीन के प्रति शंका उत्पन्न हुई....
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हर वैक्सीन की सेल्फ लाइफ होती है .... वैक्सीन के करोड़ों डोज स्टोर में यूं ही पड़े रहे ....और लाखों डोज वैक्सीन की खराब हो गई.....
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अब ऐसे में नरेंद्र मोदी ने ....वैक्सीन डिप्लोमेसी किया .... तमाम देशो को भेजा ...यहां तक कि सऊदी अरब को भी .... उन्होंने कई लाख डोज वैक्सीन दिया
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और जब भारत पर गंभीर आपदा आई ....तब हर उन देशों ने ....भारत को भी दिल खोल कर मदद किया ...जिन्हें भारत ने वैक्सीन दिया था ।
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सोचिए भारत का विपक्ष कितना निम्न कोटि का है ..
अब वही विपक्ष कह रहा है कि ....
मोदी हमें वैक्सीन  क्यों नहीं दे रहे...?

इस देश की नीतियों में समूल परिवर्तन की जरूरत है ।

साभार पोस्ट:
आप का तिवारी परिवार 

हीऩ्दू के साथ अनाचार और दुर बेवहार इसलीये किया जाता है कि ये दीसाहीन है

*हिंदु कौम एक ऐसी ही सेना है जिसका कोई लक्ष्य नहीं, कोई मंजिल नहीं, शत्रु की पहचान नहीं, अपना कोई सेनापति नहीं !*

*दुश्मन को न पहचानने वाली, नेतृत्वहीन विराट सेना भी अंततः युद्ध हार जाती है ...*

*हिंदुओं से ज्यादा राजनैतिक लक्ष्यहीन और दिशाहीन कौम कोई नहीं, क्योंकि हिंदुओं के नेता तो बहुत हैं पर उनके मन में हिंदुओं के साम्राज्य जैसा कोई लक्ष्य नहीं, कोई महत्वाकांक्षा नहीं; इसलिए हिंदु नेताओं को सेकुलरिज्म की चादर ओढ़कर हिंदुओं के रक्त की प्यासी कौम से भाईचारा निभाने में भी कोई लज्जा नहीं आती!*

*सत्ता का जो तंत्र अंग्रेज स्थापित कर गए, मात्र वे उसे ढोना चाहते हैं, उसपर बैठकर उसे भोगना चाहते हैं, यही हिंदु नेताओं की महत्वाकांक्षा है!*

*जबकि कम्युनिस्टों, मुसलमानों और ईसाईयों का स्पष्ट राजनैतिक लक्ष्य है। कम्युनिस्ट साम्यवादी शासन वाला भारत चाहते हैं, मुसलमान शरीयत कानून वाला इस्लामिक भारत चाहते हैं और ईसाई बाइबिल वाला रोमानियाई भारत चाहते हैं, पर हिंदुओं के मन में ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है।*
उनके पास चीन, अरब और रोम का मॉडल है पर हिंदुओं के पास ऐसा कोई मॉडल नहीं ।

*हिंदुओं से राजनैतिक लक्ष्य की बात करो,  महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी से मुक्ति से आगे उनकी कोई सोच नहीं होती!*
*जबकि महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी जैसी बीमारियां इसी राजनैतिक लक्ष्यहीनता के कारण हैं! जिस दिन हिंदुमन स्वराज, हिंदु साम्राज्य और अखण्ड भारत बनाने की महत्वाकांक्षा से भर जाएगा उस दिन भारत महगांई, बेरोजगारी और गरीबी जैसी बीमारियों से भी स्वतः मुक्त होने लगेगा!*

*हिंदुओं की राजनीतिक दिशाहीनता का इतिहास सदियों पुराना हो चला है। जिन्ना 'डायरेक्ट एक्शन डे' की घोषणा करता है परंतु हिन्दू उसके प्रति भी मूकदर्शक रहता है जबकि वो जानता है कि दूसरा पक्ष कभी भी कार्यवाही करके हमारा कत्लेआम कर सकता है!*
*बर्मा, अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, तिब्बत, श्रीलंका आदि को भारत से तोड़कर अलग किया जाता रहा परंतु हिंदू फिर भी मूकदर्शक बना रहा।  1947 में भारत का 31 प्रतिशत हिस्सा काटकर मुसलमानों को दे दिया जाता है, परंतु हिंदू फिर भी मूकदर्शक रहता है!  ....और पाकिस्तान देने के बाद भी मुसलमानों को भारत में बसा लेता है!*

*1947 में रोके गए मुसलमान आज फिर भारत विभाजन की मांग कर रहे हैं पर हिंदू मौन है!*
*भारत में लाखों एकड़ भूमि वक्फ बोर्डों के नाम कर दी जाती है परंतु हिंदू फिर भी मूकदर्शक रहता है!*

*हिंदू अपने अयोध्या, काशी, मथुरा जैसे तीर्थ स्थलों के उत्थान का कार्य नहीं कर पाता, फिर भी हिन्दू मूकदर्शक रहता है!*
*पूरा भारत हिंदुओ के हाथों से जा रहा है परंतु हिन्दू आज तक ये निर्धारित न सके कि हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए!*
*हिंदुओं का घर उजड़ रहा है पर हिन्दू चैन से सो रहे हैं।*

*मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र में जाइये और बात कीजिये, आप पायेगें कि हर साल हिंदू ही अपने मकान-दुकान बेचकर निकल रहे हैं!*
*और ये भारत के हर राज्य, हर शहर - कस्बे में हो रहा है।*

भारत की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है, भारत के अंदर सैकड़ों पाकिस्तान जन्म ले चुके हैं।

*भारत हिंदुराष्ट्र घोषित होगा तो सनातन संस्कृति के पोषण के लिए कानून बन सकेंगे।*
*हिंदुराष्ट्र भारत में हिंदुओं की संपत्ति अन्य कोई मजहब का व्यक्ति न खरीद सके, ऐसा कानून बना सकते हैं।*
*हिंदुराष्ट्र भारत में हिंदुओं का धर्मांतरण नहीं किया जा सके ऐसा कानून बनाया जा सकता है।*
*हिंदुराष्ट्र भारत में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर धर्म, संस्कृति और अपने पूर्वजों को कोई गाली नहीं दे सकेगा, ऐसा कानून बना सकते हैं।*
*हिंदू राष्ट्र भारत में समस्त नौकरियों में प्रथम वरीयता हिंदुओं को दी जायेगी*

 *सेकुलर भारत अपंग और असहाय है, वह अपनी संस्कृति और मूल प्रजा की रक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठा सकता, चाहे सत्ता पर कोई भी क्यों ना बैठा हो ।*

*अंग्रेजों द्वारा थोपे गए संविधान और शासन तंत्र को इसी प्रकार हम ढोते रहेंगे, तो एक दिन वह आएगा कि भारत के हर संसाधन पर और सत्ता पर मुसलमानों का शासन होगा और जिस दिन वहां सत्ता के शीर्ष पर कोई मुसलमान पहुंचेगा, उस दिन संविधान का पालन नहीं होगा बल्कि शरिया लागू कर भारत इस्लामिक राष्ट्र घोषित हो जाएगा!*
*तब तुम्हें वही मिलेगा जो मुसलमानों के 800 साल के शासन में काफिरों को मिलता रहा है.., वही मिलेगा जो ईरान में पारसियों को मिला, सीरिया में  यजीदियों को मिला...!*

*हिंदू नेता भारत को हिंदुराष्ट्र बनाने में हिचकते हैं, उसकी बात तक करने से डरते हैं, उस पर चर्चा परिचर्चा करने से उनके हाथों में कंपन शुरू हो जाता है! परंतु याद रखना, जिस दिन मुसलमान सत्ता के शीर्ष पर होगा उस दिन इस्लामिक राष्ट्र घोषित करने में उन्हें तनिक भी लज्जा, हिचक और देर नहीं होगी!*  
*इस्लामिक भारत में जो रोड़ा बनेगा उसे पारसियों, यजीदियों, सिंध और कश्मीरी हिंदुओं की तरह काट दिया जाएगा।*
*सिंध व कश्मीर में हिन्दुओं के साथ क्या हुआ, यह भी ध्यान में रखना चाहिए।*
 
👍. आप तिवारी परीवार
जय श्री राम 

दूनीय की येही कहानी है

😥✅ एक बार एक लड़के ने एक सांप पाला , वो सांप से बहुत प्यार करता था उसके साथ ही घर में रहता .. एक बार वो सांप बीमार जैसा हो गया उसने खाना खाना भी छोड़ दिया था , यहाँ तक कई दिनों तक उसने कुछ नहीं खाया तो वो लड़का परेशान हुआ और उसे वेटरिनरी डॉ के यहाँ ले के गया .... डॉ ने सांप का चैक अप किया और उस लड़के से पूछा " क्या ये सांप आपके साथ ही सोता है ?" उस लड़के ने बोला हाँ .... डॉ ने बोला आपसे बहुत सट के सोता है लड़का बोला हाँ ............ डॉ ने पूछा क्या रात को ये सांप अपनी पूरी बॉडी को स्ट्रेच करता है ...?

ये सुन कर लड़का चौंका उसने कहा हाँ डॉ .. ये रात को अपनी बॉडी को बहुत बुरी तरह स्ट्रेच करता है और मुझसे इसकी इतनी बुरी हालत देखी नहीं जाती ,, और मैं किसी भी तरह से इसका दुःख दूर नहीं कर पाता ........

डॉ ने कहा .... इस सांप को कोई बीमारी नहीं है ... और ये जो रात को तुम्हारे बिल्कुल बगल में लेट कर अपनी बॉडी को स्ट्रेच करता है वो दरअसल तुम्हें निगलने के लिए अपने शरीर को तुम्हारे बराबर लम्बा करने की कोशिश करता है .... वो लगातार ये परख रहा है कि तुम्हारे पूरे शरीर को वो ठीक से निगल पायेगा या नहीं और निगल लिया तो पचा पायेगा या नहीं .............

इसलिए इस घटना से हमें ये शिक्षा मिलती है कि जो आपके साथ हर वक्त रहते हैं .... जिनके साथ आप खाते पीते उठते बैठते सोते हैं ...... जरुरी नहीं कि वो भी आपको उतना ही प्यार करते हो जितना आप उन्हें प्यार करते हैं हो सकता है वो आपको निगलने के लिए अपना आकार धीरे-धीरे बढ़ा रहा हो और आप निरे भावुक होकर उसकी दीन हीन दिशा को देखकर द्रवित हो रहे हो..🙁😔
ये आज का सच है कृपया बच कर रहे

पोस्ट लेखक -आप का तिवारी परिवार 


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लंका से हनुमान जी को शुमेरू परबत से संजीवनी बूटी को लेकर आने कितना समय लगा

#हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी थी  #जानिए हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी रही होगी उसका अंदाजा आप लगा सकते हैं की रात्रि को 9:00 ...