बुधवार, 22 मई 2019

जिंदगी किसे कहते हैं

Image result for motivation

बनते बिगड़ते हालातों का
हिसाब है जिंदगी,
हर रोज एक नया पन्ना जुड़ता है जिसमें
वो ही एक किताब है जिंदगी।
हर पल एक नया किस्सा,
तैयार रहता है अपना अंत पाने को,
ग़मों के दौर में, खुशियों की राह तकते हैं कई लोग
तड़पते हैं पेड़ और पंछी पतझड़ में जैसे बसंत पाने को।
कभी कड़ी धूप सी परेशानियाँ
जलाती रहती हैं दर्द की एक आग सीने में,
कभी खुशियों में आनंद मिलता है तो
खुशबू आती है पसीने में,
मजबूरियों का सिलसिला
चलता रहता है सबकी राहों में,
बदल देते हैं वो शख्स कायनात अपनी
होती है जान हौसलों की जिनकी बाहों में।
छिपा कर रखती है कई राज अनजाने से
कहने को वो हिजाब है जिंदगी
हर रोज एक नया पन्ना जुड़ता है जिसमें
वो ही एक किताब है जिंदगी।
आप का तिवारी परिवार
धन्यवाद

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

जो मेरे कांग्रेसी मित्रों को एक बार. जरूर ही पढना चाहिए

मैं सोच रहा हूँ.....
पाकिस्तान में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
अफगानिस्तान में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
सीरिया में मुसलमानों की हत्या कौन कर रहा है ?
यमन में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
इराक में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
लीबिया में मुसलमानों की हत्या कौन कर रहा है ?
कौन है जो मिस्र में मुसलमानों को मार रहा है ?
जो सोमालिया में मुसलमानों को मार रहा है ?
बलूचिस्तान में भी मुसलमानों को मार रहा है ?
अब मैं सोच रहा हूँ जब ये सभी देश इस्लामिक हैं... तब शान्ति कहाँ है ?
मैं इस्लाम पर सवाल नहीं कर रहा हूँ, क्योंकि सभी लोग जानते हैं की इस्लाम एक
शांतिपूर्ण धर्म है... लेकिन शांति रहस्यमय रूप से से गायब है....!! 
अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लेबनान, यमन और मिस्र को क्या बजरंग-दल या
हिन्दू-महासभा ने बर्बाद किया है ? या वहां दंगा करने के लिए आर .एस. एस.
के लोग गए थे?
अजीब विडम्बना है ,
कुछ ग़द्दारों के लियें यहाँ
इशरत "बेटी" है,
कन्हैया "बेटा" है,
दाऊद "भाई" है,
अफ़ज़ल "गुरू" है,
लेकिन,
भारत "माता" नहीं !!!
आखिर...ऐसा क्यों है........???
बौद्ध +हिन्दू =रहने में समस्या नहीं
हिन्दू + ईसाई = रहने में समस्या नहीं ,
हिन्दू + यहूदी = रहने में समस्या नहीं,
ईसाई +नास्तिक =रहने में समस्या नहीं,
नास्तिक +बौद्ध = कोई समस्या नहीं,
बौद्ध + सिख = कोई समस्या नहीं,
सिख + हिन्दू = कोई समस्या नहीं,
कन्फ्यूशियस + हिन्दू =कोई समस्या नहीं,
अब थोड़ा और ध्यान दीजिए...
मुस्लिम +हिन्दू = समस्या
मुस्लिम +बौद्ध =समस्या
मुस्लिम + ईसाई = समस्या
मुस्लिम +Jews =समस्या
मुस्लिम + सिख = समस्या
मुस्लिम + Baha'is = समस्या
मुस्लिम + नास्तिक = समस्या
मुस्लिम +Atheists =समस्या
मुस्लिम +मुस्लिम =बहुत बड़ी समस्या!
उदाहरण देखिए, जहां-जहां मुस्लिम बहुसंख्यक है, वहाँ वे सुखी नहीं रहते हैं और न दूसरे को रहने देते हैं!
देखिए ...
मुस्लिम सुखी नहीं गाजा में
मुस्लिम सुखी नहीं Egypt में
मुस्लिम सुखी नहीं लीबिया में
मुस्लिम सुखी नहीं मोरोक्को में
मुस्लिम सुखी नहीं ईरान में
मुस्लिम सुखी नहीं ईराक में
मुस्लिम सूखी नहीं यमन में
मुस्लिम सुखी नहीं अफगानिस्तान में
मुस्लिम सुखी नहीं पाकिस्तान में
मुस्लिम सुखी नहीं सीरिया में
मुस्लिम सुखी नहीं लेबनान में
मुस्लिम सुखी नहीं नाइजीरिया में
मुस्लिम सुखी नहीं केन्या में
मुस्लिम सुखी नहीं सूडान में
अब गौर कीजिए .........!
मुस्लिम सुखी वहां हैं, जहाँ कम संख्या में है...??
मुस्लिम सुखी है आस्ट्रेलिया में
मुस्लिम सुखी है इंग्लैंड में
मुस्लिम सुखी है बेल्जियम में
मुस्लिम सुखी है फ्रांस में
मुस्लिम सुखी है इटली में
मुस्लिम सुखी है जर्मनी में
मुस्लिम सुखी है स्वीडन में
मुस्लिम सुखी है U.S.A. में
मुस्लिम सुखी है कनाडा में
मुस्लिम सुखी है भारत में
मुस्लिम सुखी है नार्वे में
मुस्लिम सुखी है नेपाल में
मुसलमान हर उस देश में सुखी है !
जो इस्लामिक देश नही है ........
और देखिये कि वो उन्ही देशो को दोषी ठहराते है जो इस्लामिक नही हैं....!
या जहां मुस्लिमो की लीडरशिप नही है.....!
मुस्लिम हमेशा उन देशो को ब्लैम करते है जहा वे सुखी हैं.......!
और मुस्लिम उन देशो को बदलना चाहते है..... जहा वे सुखी हैं !
और बदल कर वे उन देशो की तरह कर देना चाहते हैं!
जहा वे सुखी नही हैं........!
और अंत तक वो इसके लिए लड़ाई करते हैं....! और इसको ही बोलते हैं........
* @्लामिक_जिहाद*
अब थोड़ा आतंकवादी संगठनो पर नजर डालिए........!
जिनके द्वारा वह दुनिया को बदलना चाहते हैं....!
1.ISIS = इस्लामी आतंकवादी संगठन ,
2.अल कायदा = आतंकवादी संगठन ,
3.तालिबान = आतंकवादी संगठन
4.हमास = आतंकवादी संगठन
5.हिज्बुल मुजाहिदीन=आतंकवादी संगठन
6.बोको हराम =आतंकवादी संगठन
7.Al-Nusra =आतंकवादी संगठन
8.अबू स्याफ = आतंकवादी संगठन
9.अल बदर = आतंकवादी संगठन
10.मुस्लिम ब्रदरहुड = आतंकवादी संगठन
11.लश्कर-ए-तैयबा = आतंकवादी संगठन 12.Palestine Liberation Front  
=आतंकवादी संगठन
13.ISLAMIC TERROR ORGANIZATION
Ansaru =आतंकवादी संगठन
14.जेमाह इस्लामिया = इस्लामी आतंकवाद
संगठन
15.अब्दुल्ला आजम ब्रिगेड = आतंकवादी
  संगठन
आदि और भी हैं ऐसे ही इस्लामिक जेहादी आतंकवादी संगठन!
अब इतना तो आप सभी, जरूर समझ गए होंगे कि......
"आतंकवादी" का "मजहब" क्या होता है.....???
अब अगर कोई हिन्दुओ को बदनाम करता है........
भगवा आतंकवाद के नाम पर, तो .......
उसे वहीं पकड़ कर ...................
ये काला चिठ्ठा अवश्य दिखाएं...........!
बस इन्ही जैसे लोगो के बल पर इस्लामिक जिहाद बढ़ता है.........!
आश्चर्य......घोर आश्चर्य.........?होता.?.....हैं

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

यह मेरी सोच है ज्यादा आपसे अपेक्षा

Image result for 3rd world war
मोदी जी अब जागो वीरता का प्रदर्शन दिखाओ पाकिस्तान को एक परमाणु बम से हमला करो जिससे यह दुनिया से उसका नामोनिशान मिट जाए ऐसे देश को दुनिया में रहने का कोई हक नहीं है ऐसे  ऐसा  दुनिया में रहने का कोई हक नहीं  भारत पर विश्व बिरादरी की कोई प्रतिबंध आती है हम भारतीय उसका डट के मुकाबला करेंगे और अगर जो हमें आर्थिक प्रतिबंधित किया गया तो हम कितना भी प्रतिबंध हो लेकिन विश्व बिरादरी प्रतिबंध लगाई तो  भी सामना करेंगे चाहे हमें कुछ दिन घास की रोटी खाकर भी बिताना पड़े तो हम बिता लेगें दुनिया से मिटा डालो ऐसे  दुस्टो जो  वीर सपूतों का बलिदान हर बार देखना ना पडे अच्छा नहीं लगता एक बार जो होना है हो जाने दीजिए मैं एक भारत का नागरिक होने के नाते आपसे अनुरोध करता हूं कि आप अपने असीम बल का प्रदर्शन करें और जो भी होगा वह देखा जाएगा बाद में वंदे मातरम जय हिंद जय भारत और मुझे उम्मीद है कि हमारे प्रधानमंत्री इस बार अच्छा से अच्छा काम करके दिखाएंगे  जिससे हमें अब ज्यादा इंतजार करना नहीं पड़ेगा और इन अलगाववादियों को शूट एंड साइट का सबसे पहले आर्डर दीजिए पत्थरबाजों को सूट करने का आदेश दीजिए अभी से ज्यादा और आपको क्या चाहिए यदि आप यह सब काम नहीं किया तो भारत की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी और यह आपके लिए अग्निपरीक्षा है यदि आप इस परीक्षा में पास हुये तो आप भारत में हमेसा राज करेंगे यह नहीं तो भारत देश आपको भूल जाएगा जय हिंद जय भारत वंदे मातरम हम आपके पास अब  कोई बहाना नहीं बचा है आपको या काम करना ही होगा क्योंकि भारत की जनता भी आपके साथ हैं और विपक्ष भी आपके साथ हैं सभी दल आपके साथ हैं जिस पर आपको गंभीरता से सोचने की जरूरत है यदि आप ऐसा ना कर सके तो हम सोचेंगे कि हमारे भारत के  सभी राजनीतिक दल और सभी नेता है वैसे आप भी आप कुछ अलग करके दिखाओ इसमें कोई राजनीति की कोई इ
जरूरत नहीं है जय हिंद जय भारत वंदे मातरम
हिंदी लिखने में कुछ गलती हुई हो तो क्षमा चाहते हैं यह मेरी आपसे अपेक्षा है



Image result for narendra modi

बुधवार, 16 जनवरी 2019

मैंकापरस्त राजनीति इसे ही कहते है जान से मारने वाले से गठबंधन करना पडे

Image result for gathbandhan

पता नहीं मुलायम सिंह यादव के दिल पर आज क्या गुज़र रही होगी । गौरतलब है कि बसपा के समर्थन से जब मुलायम सिंह यादव मुख्य मंत्री बने थे तब बहुत चाहा था उन्हों ने कि मायावती उप मुख्य मंत्री बन जाएं । ताकि जैसे-तैसे वह काबू में रहें । लेकिन मायावती ने उप मुख्य मंत्री बनने से बारंबार इंकार किया । मुलायम के काबू में कभी नहीं आईं । हर बार दिल्ली से कांशीराम के साथ लखनऊ आतीं और मुलायम से मोटी रकम वसूल कर वापस हो जातीं । और जब बहुत हो गया तो मुलायम ने हाथ खड़ा कर दिया। नियमित पैसा देने से इंकार कर दिया । नाराज हो कर कांशीराम ने समर्थन वापसी के संकेत देने शुरू किए । अंतिम बातचीत के लिए कांशीराम और मायावती एक बार फिर लखनऊ आए । स्टेट गेस्ट हाऊस में ठहरे । मुलायम को बुलवाया । मुलायम पेश हुए । कमरे में दो ही कुर्सी थी । एक पर कांशीराम आसीन थे , दूसरे पर मायावती । मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव खड़े-खड़े बात करते रहे ।
जाने क्या बात हुई कि मुलायम सिंह ने बात ही बात में खड़े-खड़े अपने कान पकड़ लिए । मायावती , कांशीराम के सामने कान पकड़े खड़े मुलायम की फ़ोटो खिंचवा लिया कांशीराम ने और उसे लखनऊ के दैनिक जागरण अख़बार में छपवा दिया । कांशीराम तो दिल्ली चले गए थे पर पैसा उगाही के लिए मायावती लखनऊ में डटी रही थीं । फ़ोटो देखते ही सपा मुखिया मुलायम सहित सपा के गुंडों का खून खौल गया । मुलायम सिंह का संकेत मिलते ही सपाई गुंडों ने 2 जून , 1994 की सुबह-सुबह गेस्ट हाऊस में ठहरीं मायावती पर हमला बोल दिया । इरादा मायावती की हत्या का था । लेकिन उस समय गेस्ट हाऊस में उपस्थित भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बड़ी फुर्ती से मायावती को उन के कमरे में धकेल कर बंद कर दिया। जिसे मायावती ने भी भीतर से बंद कर लिया । मायावती के कमरे के फोन का तार काट दिया गया । पर मायावती के पास पेजर था । वह पेजर का सीमित उपयोग करती रहीं। एक दलित पुलिस अफसर विजय भूषण जो उस समय सी ओ हज़रतगंज थे , लगातार वायरलेस मेसेज करते रहे , जिसे सुनने वाला कोई नहीं था । आज के डी जी पी , उत्तर प्रदेश , ओ पी सिंह तब लखनऊ के एस एस पी हुआ करते थे , वह भी ख़ामोश थे । लेकिन मायावती का सौभाग्य था कि जब गेस्ट हाऊस पर सपाई गुंडे मायावती की हत्या के लिए हमलावर थे , ज़ी न्यूज की टीम वहीँ थी । पर इस से बेखबर सपाई गुंडे अपना काम करते रहे थे । न्यूज़ में यह घटना देखते ही उसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी ने यह मामला लोकसभा में उठा दिया । नतीज़े में मायावती को भारी सुरक्षा मिल गई थी ।
मायावती की जान बच गई थी । बसपा के समर्थन वापसी से मुलायम सरकार का पतन हो चुका था । जल्दी ही मायावती अटल जी के आशीर्वाद से उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री बन गईं । अटल जी के आशीर्वाद और भाजपा की मदद से तीन बार मुख्य मंत्री बनी मायावती को एक मौका जब मिला कि वह अटल जी के प्रति कृतज्ञता जताएं तब उन्हों ने कृतघ्नता जताई । अटल जी को लोकसभा में समर्थन देने का वादा कर के ऐन समय पर मुकर गईं । अटल जी की सरकार गिर गई थी । जीवनदान और राजनीतिक जीवनदान देने वाले अटल जी की जब मायावती नहीं हुईं तो अखिलेश यादव या किसी और की कितनी होंगी यह आने वाला समय बताएगा । रही बात अखिलेश यादव की तो वह जब अपने पिता मुलायम सिंह यादव के नहीं हुए , पिता की पीठ में छुरा घोंप दिया तो किस के होंगे भला । जो हो , अभी तो मोदी की बाढ़ में अपनी-अपनी जान बचाने के लिए गठबंधन के पेड़ पर सांप और नेवले एक साथ खड़े हैं। देखना दिलचस्प होगा कि बहता कौन है और बचता कौन है । या कि बाढ़ ही विदा हो जाती है । कौन जानता है कि कब क्या होगा । राजनीति में कब क्या हो जाए , कौन किस का हो जाए , कौन जानता है भला ।आप   का तिवारी  परिवार ने लिखा ही है :
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए ।
- 

मंगलवार, 8 जनवरी 2019

मास्टर स्टोक इसे कहते है.

Image result for narendra modi
कापी की कुछ आच्छी बातें
ये घटना 2015 की है जब उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानी के चुनाव चल रहे थे...हस्तिनापुर के पास एक गुज्जर बहुल गांव में एक गुज्जर परिवार मे कुल 17 वोट थे.. अब आप सभी जानते हो कि ग्राम प्रधानी के इलेक्शन में 17 वोट बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं..इसलिए प्रधान पद का प्रत्येक उम्मीदवार उस घर को पूरी महत्त्वता दे रहा था...घर का मुखिया एक बुजुर्ग था जिसे शाम को पीने का शौक भी था
अब गांव देहात से जुड़ा हर व्यक्ति यह भी जानता है कि प्रधानी के चुनाव में शराब का बहुत बड़ा महत्त्व होता है तो इस गांव में भी शराब की दावतें खूब चल रही थी तो एक शाम एक प्रत्याशी पूरी एक पेटी शराब लेकर इस मुखिया के घर पहुंच जाता है मुखिया 17 वोट उसी प्रत्याशी को डलवाने का आश्वासन देकर वो शराब की पेटी रख लेता है....मुखिया के घर से निकलते ही इस प्रत्याशी को प्रधानी पद के दो अन्य प्रतिद्वंदी टकरा जाते हैं और पूछते हैं कि क्या तुम भी मुखिया के यहां शराब की पेटी देकर आये हो?
इस मुलाकात में भेद खुलता है कि मुखिया ने तीनो प्रत्याशीयों से वोट का आश्वासन देकर पूरी 3 पेटी शराब कब्जे में ले ली है
तीनो का पारा चढ़ जाता है कि मुखिया ने शराब की पेटी तो तीनों से ले ली...लेकिन वोट तो किसी एक को ही मिलेगी....इसका मतलब है मुखिया हममें से किन्ही दो को बेवकूफ बना रहा है
तीनो इकठ्ठे ही मुखिया के घर पर पहुंच गए और दूध का दूध और पानी का पानी करने निर्णय लिया
मुखिया के घर जाकर तीनो ने कहा कि “बाबा तुम वोट तो किसी एक को ही दोगे... लेकिन शराब की पेटी तुमने हम तीनों ने ले ली....इसका मतलब है कि तुम हमे मूर्ख बना रहे हो?...जिसको वोट देनी है उसकी पेटी रखो और बाकी दो लोगों की पेटियां वापस करो!
मुखिया ने हामी में सिर हिलाया और कहा कि...हां वोट तो किसी एक को ही दूंगा लेकिन शराब की पेटियां मैंने तुम तीनो से ली हैं...लेकिन अगर तुम तीनो अभी जानना चाहते हो कि मैं वोट किसे दूंगा तो मैं अभी इसका फैसला कर देता हूँ....तीनों प्रत्याशियों के कहा कि हां अभी बताओ
मुखिया ने अपने एक पोते को आवाज लगाकर बुलाया और अंदर कमरे में रखी तीनो शराब की पेटियां लाने को कहा
पोता..अंदर से शराब की तीन पेटियां उठाकर लाया और उनके बीच मे रख दी....मुखिया बोला “क्यों भाई... यही हैं ना तुम्हारी पेटियां"....तीनो ने सहमति में गर्दन हिलाई.....
मुखिया बोला...“अभी फैसला हो जाता है कि इस घर की 17 वोट तुम तीनों में किसको मिलेंगी....तुम तीनो में से जिसे भी लगता है कि मैं उसे वोट नही दूंगा अपनी शराब की पेटियां उठाकर ले जाये....जिसकी पेटी बचेगी....मेरे घर की 17 वोट उसकी!!”
अब मुखिया के इस मास्टर स्ट्रोक से तीनों प्रत्याशी हतप्रभ थे.... क्योंकि अब जो भी प्रत्याशी पहले शराब की पेटी उठाएगा...उसको तो वोट कतई ना मिलेगी और 17 वोट खोने को कोई तैयार नही था....तीनो एक दूसरे की शक्ल देख रहे थे कि पहले पेटी कौन उठाये....लेकिन उठाने को कोई भी तैयार नही था....बहरहाल तीनो ने कहा कि बाबा...पेटी तू ही रख और जिसे चाहे वोट कर दे
गरीब सामान्य वर्ग के लिए 10% आरक्षण देकर मोदी ने भी ऐसा ही एक मास्टर स्ट्रोक खेला है...सारी विपक्षी पार्टियां इसे चुनावी स्टंट या राजनैतिक स्टंट बताकर और इसकी घोषणा के समय को लेकर आलोचना कर रही हैं...लेकिन संसद में इस बिल का विरोध करना यह तय कर देगा...की सामान्य वर्ग का 15% वोट उस विरोधी पार्टी को तो कतई नही मिलेगा....और 15% वोटबैंक से कोई पंगा लेना नही चाहता....कांग्रेस ने मजबूरी में सही लेकिन संसद में बिल का समर्थन करने की घोषणा कर दी है केजरीवाल ने भी अनमने दिल से सही लेकिन समर्थन किया है....अभी यह पोस्ट लिखते-लिखते TV पर मायावती की प्रेस कांफ्रेंस भी देख रहा हूँ कि कैसे वह एक तरफ मोदी और भाजपा को कोस भी रही है और इस 10% आरक्षण का समर्थन भी कर रहीं है..
इन्हें न उगलते बन रहा है न निगलते.......यही है मोदी का मास्टर स्ट्रोक.....और अगले 2 महीने में आप ऐसे ही अन्य स्ट्रोक्स की उम्मीद भी कर सकते हैं.....क्योंकि मोदी ने पहले ही कहा था...की वह साढ़े चार साल केवल काम करेंगें...और कार्यकाल के अंत मे निखालिस राजनीति करेंगें।  
आप का तिवारी परिवार

बुधवार, 2 जनवरी 2019

महा कूम्भ का कुछ अंस इस परकार हैं

🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷

*"क्यों कुंभ का मेला 12 साल में एक बार लगता है"*

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार इन्द्र देवता ने महर्षि दुर्वासा को रास्ते में मिलने पर जब प्रणाम किया तो दुर्वासाजी ने प्रसन्न होकर उन्हें अपनी माला दी, लेकिन इन्द्र ने उस माला का आदर न कर अपने ऐरावत हाथी के मस्तक पर डाल दिया। जिसने माला को सूंड से घसीटकर पैरों से कुचल डाला। इस पर दुर्वासाजी ने क्रोधित होकर इन्द्र को श्रीविहीन होने का श्राप दिया। इस घटना के बाद इन्द्र घबराए हुए ब्रह्माजी के पास गए। ब्रह्माजी ने इन्द्र को लेकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे इन्द्र की रक्षा करने की प्रार्थना की। भगवान ने कहा कि इस समय असुरों का आतंक है। इसलिए तुम उनसे संधि कर लो और देवता और असुर दोनों मिलकर समुद्र मंथन कर अमृत निकालों। जब अमृत निकलेगा तो हम तुम लोगों को अमृत बांट देंगे और असुरों को केवल श्रम ही हाथ मिलेगा।
पृथ्वी के उत्तर भाग मे हिमालय के समीप देवता और दानवों ने समुद्र का मन्थन किया। इसके लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और नागराज वासुकि को रस्सी बनाया गया। जिसके फलस्वरूप क्षीरसागर से पारिजात, ऐरावत हाथी, उश्चैश्रवा घोड़ा रम्भा कल्पबृक्ष शंख, गदा धनुष कौस्तुभमणि, चन्द्र मद कामधेनु और अमृत कलश लिए धन्वन्तरि निकलें। इस कलश के लिए असुरों और दैत्यों में संघर्ष शुरू हो गया। अमृत कलश को दैत्यों से बचाने के लिए देवराज इन्द्र के पुत्र जयंत बृहस्पति, चन्द्रमा, सूर्य और शनि की सहायता से उसे लेकर भागे। यह देखकर दैत्यों ने उनका पीछा किया। यह पीछा बारह दिनों तक होता रहा। देवता उस कलश को छिपाने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान को भागते रहे और असुर उनका पीछा करते रहे।
इस भागदौड़ में देवताओं को पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करनी पड़ी। इन बारह दिनों की भागदौड़ में देवताओं ने अमृत कलश को हरिद्वार, प्रयाग, नासिक तथा उज्जैन नामक स्थानों पर रखा। इन चारों स्थानों में रखे गए कलश से अमृत की कुछ बूंदे छलक पड़ी। अंत में कलह को शांत करने के लिए समझौता हुआ। भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर दैत्यों को भरमाए रखा और अमृत को इस प्रकार बांटा कि दैत्यों की बारी आने तक कलश रिक्त हो गया। देवताओं का एक दिन मनुष्य के एक वर्ष के बराबर माना गया है। इसलिए हर 12 वें वर्ष कुंभ की परंपरा है।
   
*जय श्रीराधे कृष्णा*

🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷आप का तिवारी परिवार

सोमवार, 17 दिसंबर 2018

मित्रता करनी हो तो। सुदामा और श्रीकृष्ण की तरह करना चाहिए

●▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬●\
              सुदामा गरीब क्यों  थे। 

Image result for krishna sudama


 *सुदामाजी को गरीबी क्यों मिली?* *आज तक आपको ये जानकारी नहीं होगी कि सुदामा जी गरीब थे तो क्यों*
*सभी से निवेदन है*
*यह कथा अवश्य पढ़ें* 
*सुदामा को गरीबी क्यों मिली:::*
अगर अध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो सुदामा जी बहुत धनवान थे।जितना धन उनके पास था किसी के पास नहीं था ।
लेकिन अगर भौतिक दृष्टि से देखा जाये तो सुदामाजी बहुत निर्धन थे ।
*आखिर क्यों ::::::::*
एक ब्राह्मणी थी जो बहुत निर्धन थी। भिक्षा माँग कर जीवन-यापन करती थी।
एक समय ऐसा आया कि पाँच दिन तक उसे भिच्छा नहीं मिली।
वह प्रति दिन पानी पीकर भगवान का नाम लेकर सो जाती थी।
छठवें दिन उसे भिक्षा में दो मुट्ठी चना मिले । कुटिया पे पहुँचते-पहुँचते रात हो गयी। ब्राह्मणी ने सोंचा अब ये चने रात मे नही खाऊँगी प्रात:काल वासुदेव को भोग लगाकर तब खाऊँगी ।
यह सोंचकर ब्राह्मणी ने चनों को कपडे़ में बाँधकर रख दियाऔर वासुदेव का नाम जपते-जपते सो गयी ।
देखिये समय का खेल:::
*कहते हैं:::*
*पुरुष बली नहीं होत है,*
*समय  होत   बलवान ।*
ब्राह्मणी के सोने के बाद कुछ चोर चोरी करने के लिए उसकी कुटिया मे आ गये।
इधर उधर बहुत ढूँढा, चोरों को वह चनों की बँधी पुटकी मिल गयी । चोरों ने समझा इसमें सोने के सिक्के हैं । इतने मे ब्राह्मणी जाग गयी और शोर मचाने लगी ।
गाँव के सारे लोग चोरों को पकडने के लिए दौडे़। चोर वह पुटकी लेकर भागे।
पकडे़ जाने के डर से सारे चोर संदीपन मुनि के आश्रम में छिप गये।
(संदीपन मुनि का आश्रम गाँव के निकट था
जहाँ भगवान श्री कृष्ण और सुदामा शिक्षा ग्रहण कर रहे थे)
गुरुमाता को लगा कि कोई आश्रम के अन्दर आया है। गुरुमाता देखने के लिए आगे बढीं  तो चोर समझ गये कोई आ रहा है, चोर डर गये और आश्रम से भागे ! भागते समय चोरों से वह पुटकी वहीं छूट गयी।और सारे चोर भाग गये।
इधर भूख से व्याकुल ब्राह्मणी ने जब जाना ! कि उसकी चने की पुटकी  चोर उठा ले गये ।
तो ब्राह्मणी ने श्राप दे दिया कि " मुझ दीनहीन असहाय के जो भी चने  खायेगा वह दरिद्र हो जायेगा " ।
उधर प्रात:काल गुरु माता आश्रम मे झाडू़ लगाने लगीं तो झाडू लगाते समय गुरु माता को वही चने की पुटकी मिली । गुरु माता ने पुटकी खोल के देखी तो उसमे चने थे।
सुदामा जी और कृष्ण भगवान जंगल से लकडी़ लाने जा रहे थे। (रोज की तरह )
गुरु माता ने वह चने की पुटकी सुदामा जी को दे दी।
और कहा बेटा ! जब वन मे भूख लगे तो दोनो लोग यह चने खा लेना ।
सुदामा जी जन्मजात ब्रह्मज्ञानी थे। ज्यों ही  चने की पुटकी सुदामा जी ने हाथ में लिया त्यों ही उन्हे सारा रहस्य मालुम हो गया ।
सुदामा जी ने सोचा ! गुरु माता ने कहा है यह चने दोनों लोग  बराबर बाँट के खाना।
लेकिन ये चने अगर मैंने त्रिभुवनपति श्री कृष्ण को खिला दिये तो सारी शृष्टी दरिद्र हो जायेगी।
नहीं-नहीं मैं ऐसा नही करुँगा। मेरे जीवित रहते मेरे प्रभु दरिद्र हो जायें मै ऐसा कदापि नही करुँगा ।
मैं ये चने स्वयं खा जाऊँगा लेकिन कृष्ण को नहीं खाने दूँगा।
और सुदामा जी ने सारे चने खुद खा लिए।
दरिद्रता का श्राप सुदामा जी ने स्वयं ले लिया। चने खाकर।
लेकिन अपने मित्र श्री कृष्ण को एक भी दाना चना नही दिया।
ऐसे होते हैं मित्र 
मित्रों ! आपसे निवेदन है कि अगर
मित्रता करें तो सुदामा जी जैसी करें और कभी भी अपने मित्रों को
धोखा ना दें ।
 *जय श्री राधे कृष्णा जी* 
●▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬●
आप का तिवारी परिवार

मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

किसी को मरके आजादी मीलती हैं. औरक किसी को आजादी के.लिए मरना पडता हैं

Image result for parrot in cage thinking for freedom


एक गांव में एक आदमी अपने तोते के साथ रहता था,एक बार जब वह आदमी किसी काम से दूसरे गांवजा रहा था,तो उसके तोते ने उससे कहा – मालिक, जहाँ आप जा रहे हैंवहाँ मेरा गुरु-तोता रहता है. उसके लिए मेरा एक संदेश ले जाएंगे?क्यों नहीं जरूर !
तोते ने कहा मेरा संदेश है-: आजाद हवाओं में सांस लेने वालों के नाम एक बंदी तोते का सलाम ..वह आदमी दूसरे गांव पहुँचा और वहाँ उस गुरु-तोते को अपने प्रिय तोते का संदेश बताया, संदेश सुनकर गुरु- तोता तड़पा, फड़फड़ाया और मर गया ..जब वह आदमी अपना काम समाप्त कर वापस घर आया,तो उस तोते ने पूछा कि क्या उसका संदेश गुरु-तोते तक पहुँच गया था,आदमी ने तोते को पूरी कहानी बताई कि कैसे उसका संदेश सुनकर उसका गुरु तोता तत्काल मर गया था ।
यह बात सुनकर वह तोता भी तड़पा,फड़फड़ाया और मर गया |उस आदमी ने बुझे मन से तोते को पिंजरे से बाहर निकाला और उसका दाह-संस्कार करने के लिए ले जाने लगा,जैसे ही उस आदमी का ध्यान थोड़ा भंग हुआ,वह तोता तुरंत उड़ गया और जाते जाते उसने अपने मालिक को बताया –"मेरे गुरु-तोते ने मुझे संदेश भेजा था कि अगर आजादी चाहते हो तो पहले मरना सीखो" . . . . . . . .बस आज का यही सन्देश कि अगर वास्तव मेंआज़ादी की हवा में साँसलेना चाहते हो तो उसके लिए निर्भय होकर मरना सीख लो . . .

जय जय श्री  राम

आप का तिवारी परिवार ,,,,,,,

शनिवार, 8 दिसंबर 2018

दोहरा चरित्र जादा दिन. तक नही चलता

नवाज शरीफ के बाद इमरान खान पाकिस्तान के दूसरे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने स्वीकार किया की भारत में हुआ 26/11 आतंकवादी हमला पाकिस्तान के आतंकियों ने अंजाम दिया था,

विडंबना देखिए एक ओर पाकिस्तान के दो प्रधानमंत्री यह स्वीकार कर चुके हैं कि 26/11 आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ था, जबकि भारत की सबसे पुरानी राजनितिक पार्टी कांग्रेस 26/11 आतंकी हमले के दोषी पाकिस्तान को बचाने और हमले का दोष हिंदुओं और RSS के सर मढ़ने की योजना बना बैठी थी और पूरा प्रयास भी किया था,

साथ ही साथ हमारे देश में जिस बॉलीवुड को देश के युवा अपने सिर पर बिठाकर रखते हैं उसी बॉलीवुड के बड़े व्यक्ति महेश भट्ट का बेटा राहुल भट्ट आतंकवादी दाऊद गिलानी उर्फ डेविड कोलमैन हेडली को 26/11 आतंकी हमले की रेकी करने में सहायता कर रहा था,
और 26/11 के पश्चात उसका बाप महेश भट्ट 26/11 के लिए हिंदुओं और RSS को दोषी बताता फिर रहा था,
आज वही महेश भट्ट कह रहा है कि मोदी के नेतृत्व वाला भारत मुस्लिमों के लिए एक बुरे स्वप्न सरीखा है,

क्या महेश भट्ट यह कहना चाहते हैं कि मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत के अंदर जिस प्रकार इस्लामिक आतंकवाद की घटनाओं पर रोक लगी है और निर्दोषों की जानें बच गयीं है, क्या वो महेश भट्ट के अनुसार मुस्लिमों के लिए एक बुरे स्वप्न वाली स्थिति है ?

आज हमारे देश के नागरिकों को विचार करने की आवश्यकता है कि कहीं उन्होंने गलत व्यक्तियों को तो अपना आदर्श नहीं मान लिया है, और कहीं वे इस्लामिक आतंकियों का बचाव करने वाली विचारधारा की राजनीतिक पार्टियों के जाल में तो नही फंसे हुए हैं ?
आज कांग्रेस को जबाब देना चाहिए
और मुझे तो सक हैं कि कहीं कांग्रेस ही. तो नहीं
इस कि सूत्र धार तो नहीं हैं इस की भी सीबीआई
जाचं होनी चाहिए
आप सभी निबेदन कि इस खबर को इतना सेर करो कि
महा महीम तक और परधान मंत्री तक पहुंच जाये

धन्यवाद
आप। का तिवारी परिवार

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

दहेज का दानौ कीतने परिवार को खा गया हैं

*कर्ज वाली लक्ष्मी*
एक 15 साल का भाई अपने पापा से कहा "पापा पापा दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे है" अभी जीजाजी ने फोन पर बताया।
दीदी मतलब उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी।

दीनदयाल जी पहले से ही उदास बैठे थे धीरे से बोले...

हां बेटा.. उनका कल ही फोन आया था कि वो एक दो दिन में दहेज की बात करने आ रहे हैं.. बोले... दहेज के बारे में आप से ज़रूरी बात करनी है..
बड़ी मुश्किल से यह अच्छा लड़का मिला था.. कल को उनकी दहेज की मांग इतनी ज़्यादा हो कि मैं पूरी नही कर पाया तो ?"

कहते कहते उनकी आँखें भर आयीं..

घर के प्रत्येक सदस्य के मन व चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी...लड़की भी उदास हो गयी...

खैर..
अगले दिन समधी समधिन आए.. उनकी खूब आवभगत की गयी..

कुछ देर बैठने के बाद लड़के के पिता ने लड़की के पिता से कहा" दीनदयाल जी अब काम की बात हो जाए..

दीनदयाल जी की धड़कन बढ़ गयी.. बोले.. हां हां.. समधी जी.. जो आप हुकुम करें..
लड़के के पिताजी ने धीरे से अपनी कुर्सी दीनदयाल जी और खिसकाई ओर धीरे से उनके कान में बोले. दीनदयाल जी मुझे दहेज के बारे बात करनी है!...

दीनदयाल जी हाथ जोड़ते हुये आँखों में पानी लिए हुए बोले बताईए समधी जी....जो आप को उचित लगे.. मैं पूरी कोशिश करूंगा..

समधी जी ने धीरे से दीनदयाल जी का हाथ अपने हाथों से दबाते हुये बस इतना ही कहा.....
आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे... थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे.. मुझे सब स्वीकार है... पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना.. वो मुझे स्वीकार नहीं..

क्योकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी "कर्ज वाली लक्ष्मी" मुझे स्वीकार नही...

मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए.. जो मेरे यहाँ आकर मेरी सम्पति को दो गुना कर देगी..
दीनदयाल जी हैरान हो गए.. उनसे गले मिलकर बोले.. समधी जी बिल्कुल ऐसा ही होगा..

शिक्षा- *कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करें नही कोई स्वीकार करे  और अपने समाज मे छूपे दहेज के दानौ 
का बहीस्कार करें अगर आप को ए कहानी अच्छी लगीं हो तो इसे सेर जरूर करें 
आप का तिवारी परिवार       .

,,,,,

🙏🏻
🙏🏻

शनिवार, 3 नवंबर 2018

कुडे के ढेर मे हीरा उठाया सब्जी वाले ने तो उसकी तकदीर ही बदल गई

ठेले वाले ने कूड़े के ढेर से उठाया था इस लड़की को, 25 साल बाद लड़की ने चुकाया इस तरह एहसान
जिन्दगी कब कौन सा करवट बदल दे किसी को कुछ नहीं पता। जिन्दगी कभी कूड़े के ढेर में बिलखती है तो कभी आसमान में उड़ने लगती है। दोस्तों इंसान बनाया ही गया है, इंसान की मदद करने के लिए किन्तु कोई अपना कर्तव्य निभाता है तो कोई पीछे हट जाता है। आज की घटना कुछ ऐसी ही है। सोमवार का दिन था सोबरन अपना सब्जी का ठेला लेकर घर आ रहा था। थोड़ी दूर चलने पर उसे झाड़ियों से एक बच्चे की रोने की आबाज सुनाई दी। सोबरन ने आपना ठेला रोंका और उस तरफ जाकर झाड़ियों में देखा तो उसके होश उड़। एक मासूम बच्चा कूड़े के ढेर पर पड़ी बिलख -बिलख कर रो रहा था ।
सोबरन ने इधर उधर देखा और जब कोई नहीं दिखाई दिया तो उसने उसे गोद में उठा लिया। सोबरन ने देखा की वो एक ख़ूबसूरत लड़की है। सोबरन उसे अपने घर ले आया। सोबरन की उस समय उम्र 30 वर्ष थी और उसकी शादी भी नहीं हुई थी। सोबरन उस बच्ची को पाकर बहुत खुस था। उसने उसे पालने और शादी न करने का निर्णय लिया। यह घटना है आसाम के जिला तिनसुखिया की जहाँ सोबरन रोजी रोटी के लिए अपना सब्जी का ठेला चलाता था। उसी समय यह लड़की सोबरन को मिली थी। सोबरन ने कठिन मेहनत कर उसे अपनी बेटी की तरह पाला और उस लड़की का नाम रखा ज्योती। सोबरन दिन और रात मेहनत कर अपनी बेटी को पढ़ाता और किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होने देता।
खुद एक बार भूखा सो जाता किन्तु अपनी बेटी को कभी किसी चीज की कमीं नहीं होने देता। सोबरन ने 2013 में कम्प्युटर साइंस से स्नातक कराया और इसके बाद ज्योती तैयारी में जुट गई। इसके बाद 2014 में ज्योती ने आसाम लोक सेवा आयोग से पीसीएस की परीक्षा में कामयाबी हासिल की और उसे आयकर सहायक आयुक्त के पद पर पोस्टिंग दी गई। सोबरन अपनी बेटी को देखकर आंसुओं से भीग गया क्योकि उसकी बेटी ने उसके सभी सपने पूरे कर दिए। आज ज्योती अपने पिता को साथ रखती है और उनकी हर ख्वाहिस को पूरी करती है। सोबरन कहता है मैंने कूड़े से लड़की नहीं एक हीरा उठाया था जो आज हमारी बुढ़ापे की लाठी बन गया। आज सोबरन अपने आप को धन्य समझता है।    अच्छा लगा हो तो सेर जरूर किजिए धन्यवाद

होली प्रबल होती है

*होनी बहुत बलवान है* अभिमन्यु के पुत्र ,राजा परीक्षित थे |  राजा परीक्षित के बाद उन के लड़के जनमेजय राजा बने | एक दिन जनमेजय वेदव्यास जी के ...