सोमवार, 23 सितंबर 2019

घर मे पुजा करने की बीधी

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घर पर पूजा-पाठ करने का क्या है सही विधि!!!!!!!
कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले या फिर किसी काम में सफलता प्राप्त करने के लिए सभी लोग अक्सर घर में पूजा पाठ करवाते हैं, ताकि उन्हें अपने लक्ष्य में सफलता मिल सके।
अपनी मनोकामना जल्दी पूरी हो सके, इसके लिए घर में पूजा-पाठ और मांगलिक उत्सव करने का सही तरीका इस प्रकार हैं :- और उसके लिए पूजा-पाठ करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए..
*घर में पूजा-पाठ का सही स्थान क्या हो..??*
:
-घर में हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में ही मंदिर का स्थान रखें।
-घर का मंदिर हमेशा लकड़ी का बना होना चाहिए।
-घर के मंदिर के आसपास कोई गंदगी न हो। उसे हमेशा साफ-सुथरा ही रखें।
*||*
*घर के मंदिर का मुख्य रंग क्या हो..??*
:
-मंदिर का सही रंग हल्का पीला या नारंगी होना चाहिए।
-घर के मंदिर में हमेशा हल्की पीली लाइट का प्रयोग करना चाहिए।
-मंदिर में गहरे नीले रंग का प्रयोग नहीं करें।
*||*
*घर के मंदिर में क्या-क्या रखना चाहिए..??*
:
-घर के मंदिर में हलके पीले रंग का या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
-भगवान गणपति और महालक्ष्मी का स्वरूप रखें।
-अपने इष्ट और अपने कुल गुरु का चित्र अवश्य रखें।
-एक तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर रखें।
*||*
*घर का मंदिर बनाते समय क्या-क्या सावधानी बरते..??*
:
-घर का मंदिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में न बनाएं।
-मंदिर के आसपास कोई गंदगी न हो।
-मंदिर शौचालय के पास बिल्कुल न बनाएं।
-मंदिर के आसपास जूते-चप्पल कभी भी न रखें।
*||*
*कौन-सी दिशा में बैठकर भजन कीर्तन जाप किया जाए..??*
:
-हमेशा भजन कीर्तन पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके किया जाए तो सर्वोत्तम रहता है। अन्य किसी दिशा में किया गया भजन कीर्तन मन में उत्साह नहीं ला पाता।
-भजन कीर्तन करने से पहले भगवान मंगल मूर्ति के चित्र को हमेशा स्थापित करें उसके बाद ही भजन कीर्तन शुरू करें।
-जिस देवी-देवता का भजन किया जा रहा है उसके चित्र के सामने गाय के घी का दीपक और धूप अवश्य जलाएं व जल का पात्र भी रखें।
*||*
*भजन कीर्तन में बरतें ये सावधानियां..*
:
-भजन कीर्तन करते समय इधर-उधर की बातों में ध्यान न दें।
-हमेशा शुद्ध और साफ वस्त्र पहनकर ही भजन कीर्तन करें।
-भजन कीर्तन में शुद्ध मिठाई और साफ-सुथरे फलों का प्रयोग करें।
-हमेशा भजन कीर्तन में गाय के घी का दीपक और कलावे की बाती का प्रयोग करें।
*||*
*घर में पूजा पाठ और जाप का पूरा फल पाने के लिए करें उपाय..*
:
-घर में पूजा-पाठ करते समय श्वेत गुलाबी या हल्के पीले वस्त्र पहनकर ही पूजा करें।
-हमेशा लाल या पीले आसन पर बैठकर ही मंत्र जाप करें।
-जाप हमेशा लाल चंदन की माला या रुद्राक्ष की माला से करें।
-जाप शुरू करने से पहले भगवान गणपति व गुरु और अपने इष्ट का ध्यान करना चाहिए। उसके बाद ही जाप शुरू करें।
*||*
*सभी तरह की परेशानियों को दूर करने के उपाय..*
:
-घर में अकारण कलह रहती हो तो प्रतिदिन सुबह गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें।
-घर में यदि कोई बीमार रहता हो तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं।
-घर में धन की कमी हो तो श्री नारायण भगवान को पीले पुष्प चढ़ाएं।
-घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकने के लिए घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों की बंदनवार लगाएं..!!
जय श्री राम    आप का  तिवारी परिवार
जय श्री राम

गुरुवार, 18 जुलाई 2019

अथक प्रयास के बाद यह जानकारी मिल पायी ह

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श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ | शेयर करे ताकि हर हिंदू इस जानकारी को जाने..
रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य
1:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।
2:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।
3:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।
4:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।
5:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।
6:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।
7:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।
8:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।
9:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।
10:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी।
11:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।
12:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला।
13:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।
14:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ।
15:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी हैं।
16:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं।
17:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए।
18:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में।
19:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।
यह जानकारी  महीनों के परिश्रम केबाद आपके सम्मुख प्रस्तुत है ।
आप का तिवारी  परिवार

सोमवार, 1 जुलाई 2019

कभी कभी मां-बाप को लड़कों के प्रति ऐसा सोचना चाहिए

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“हर उस बेटे को समर्पित जो घर से दूर है चाहे वो होस्टल में हो या नोकरी के लिए दूर शहर में..”
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं...
जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…
अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं...
घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की जरूरत में…वो घर से अजनबी बन जाते हैं
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।
बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,
माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है।
कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।
लड़के भी घर छोड़ जाते है।
मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,
जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,,,
माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं
तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं
नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,
बेटियाँ ही नही साहब, बेटे घर छोड़ जाते हैं...
मित्रो पोस्ट अच्छा लगे तो शेयर जरूर करे...

गुरुवार, 6 जून 2019

राधा जी के धाम में कितनी शक्ति है यह कहानी पढ़कर आपको पता लग जाएगा

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राधा नाम से संत की आँखे ठीक हो गई
एक संत थे वृन्दावन में रहा करते थे, श्रीमद्भागवत
में बड़ी निष्ठा उनकी थी, उनका प्रतिदिन
का नियम था कि वे रोज एक अध्याय का पाठ
किया करते थे, और राधा रानी जी को अर्पण करते
थे ,ऐसे करते करते उन्हे 55 वर्ष बीत गए,पर
उन्होंने एक दिन भी ऐसा नही गया जब
राधारानी जी को भागवत का अध्याय न
सुनाया हो.
एक रोज वे जब पाठ करने बैठे तो उन्हें अक्षर
दिखायी ही नहीं दे रहे थे और थोड़ी देर बाद
तो वे बिलकुल भी नहीं पढ़ सके अब तो वे रोने लगे
और कहने लगे - हे प्रभु ! में इतने दिनों से पाठ कर
रहा हूँ फिर आपने आज ऐसा क्यों किया अबमै कैसे
राधारानी जी को पाठ सुनाऊंगा. रोते-रोते
उन्हें सारा दिन बीत गया.
कुछ खाया पिया भी नहीं क्योकि पाठ करने
का नियम था और जब तक नियम पूरा नहीं करते,
खाते पीते भी नहीं थे, आज नियम नहीं हुआ
तो खाया पिया भी नहीं.
तभी एक छोटा-सा बालक आया और बोला - बाबा!
आप क्यों रो रहे हो? क्या आपकी आँखे नहीं है
इसलिए रो रहे हो ?
बाबा बोले- नहीं लाला! आँखों के लिए
क्यों रोऊंगा मेरा नियम पूरा नहीं हुआइसलिए
रो रहा हूँ.
बालक बोला - बाबा! मै आपकी आँखे ठीक कर
सकता हूँ आप ये पट्टी अपनी आँखों पर बाँध लीजिए,
बाबा ने सोचा लगता है वृंदावन के किसी वैध
का लाला है कोई इलाज जानता होगा, बाबा ने
आँखों पर पट्टी बांध ली और सो गए, जब सुबह उठे
औरपट्टी हटाई तो सबकुछ साफ दिखायी दे
रहा था.
बाबा बड़े प्रसन्न हुए और सोचने लगे देखूं तो उस
बालक ने पट्टी में क्या औषधि रखी थी और जैसे
ही बाबा ने पट्टी को खोला तो पट्टी में
राधा रानी जी का नाम लिखा था इतना देखते
ही बाबा फूट फूट कर रोने लगे और कहने लगे - वाह!
किशोरी जी आपके नाम की कैसी अनंत महिमा ह जय श्री राधे राधे

रविवार, 26 मई 2019

पति पत्नी के बीच सीन्दूर का क्या महत्व है

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मान्यताओं के अनुसार-----
यदि पत्नी के #माँग के बीचो बीच सिन्दूर लगा हुआ है तो उसके पति की अकाल मृत्यू नही हो सकती है।
जो स्त्री अपने माँग के सिन्दूर को बालो से छिपा लेती है उसका पति समाज मेँ छिप जाता है
जो स्त्री बीच माँग मेँ सिन्दूर न लगाकर किनारे की तरफ सिन्दूर लगाती है उसका पति उससे किनारा कर लेता है।
यदि स्त्री के बीच माँग मेँ सिन्दूर भरा है तो उसके पति की आयु लम्बी होती है।
रामायण मेँ एक प्रसंग आता है जब बालि और सुग्रीव के बीच युध्द हो रहा था तब श्री राम ने बालि को नही मारा।
जब बालि के हाथो मार खाकर सुग्रीव श्री राम के पास पहुचा तो श्री राम ने कहा की तुम्हारी और बालि की शक्ल एक सी है इसिलिये मैँ भ्रमित हो गया
अब आप ही बताइये श्री राम के नजरो से भला कोई छुप सकता है क्या?
असली बात तो यह थी जब श्री राम ने यह देख लिया की बालि की पत्नी तारा का माँग सिन्दूर से भरा हुआ है तो उन्होने सिन्दूर का सम्मान करते हुये बालि को नही मारा ।
दूसरी बार जब सुग्रीव ने बालि को ललकारा तब तारा स्नान कर रही थी उसी समय भगवान ने देखा की मौका अच्छा है और बाण छोड दिया अब आप ही बताइये की जब माँग मेँ सिन्दूर भरा हो तो
परमात्मा भी उसको नही मारते फिर उनके सिवाय कोई और क्या मारेगा।
यह पोस्ट मै इसीलिये कर रहाँ हुँ की आजकल फैसन चल रहा है सिन्दूर न लगाने की या हल्का लगाने की या बीच माँग मेँ न लगाकर किनारे लगाने की ।
मैँ आशा करता हुँ की मेरे इस पोस्ट से आप लोग सिन्दूर का महत्व समझ गयी होँगी और अपने पति की लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थय के लिये अपने पति के नामका सिन्दूर अपने माँग मेँ भरे रहेगी हेलो मेरा विचार है आपका तिवारी परिवार

बुधवार, 22 मई 2019

जिंदगी किसे कहते हैं

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बनते बिगड़ते हालातों का
हिसाब है जिंदगी,
हर रोज एक नया पन्ना जुड़ता है जिसमें
वो ही एक किताब है जिंदगी।
हर पल एक नया किस्सा,
तैयार रहता है अपना अंत पाने को,
ग़मों के दौर में, खुशियों की राह तकते हैं कई लोग
तड़पते हैं पेड़ और पंछी पतझड़ में जैसे बसंत पाने को।
कभी कड़ी धूप सी परेशानियाँ
जलाती रहती हैं दर्द की एक आग सीने में,
कभी खुशियों में आनंद मिलता है तो
खुशबू आती है पसीने में,
मजबूरियों का सिलसिला
चलता रहता है सबकी राहों में,
बदल देते हैं वो शख्स कायनात अपनी
होती है जान हौसलों की जिनकी बाहों में।
छिपा कर रखती है कई राज अनजाने से
कहने को वो हिजाब है जिंदगी
हर रोज एक नया पन्ना जुड़ता है जिसमें
वो ही एक किताब है जिंदगी।
आप का तिवारी परिवार
धन्यवाद

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

जो मेरे कांग्रेसी मित्रों को एक बार. जरूर ही पढना चाहिए

मैं सोच रहा हूँ.....
पाकिस्तान में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
अफगानिस्तान में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
सीरिया में मुसलमानों की हत्या कौन कर रहा है ?
यमन में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
इराक में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
लीबिया में मुसलमानों की हत्या कौन कर रहा है ?
कौन है जो मिस्र में मुसलमानों को मार रहा है ?
जो सोमालिया में मुसलमानों को मार रहा है ?
बलूचिस्तान में भी मुसलमानों को मार रहा है ?
अब मैं सोच रहा हूँ जब ये सभी देश इस्लामिक हैं... तब शान्ति कहाँ है ?
मैं इस्लाम पर सवाल नहीं कर रहा हूँ, क्योंकि सभी लोग जानते हैं की इस्लाम एक
शांतिपूर्ण धर्म है... लेकिन शांति रहस्यमय रूप से से गायब है....!! 
अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लेबनान, यमन और मिस्र को क्या बजरंग-दल या
हिन्दू-महासभा ने बर्बाद किया है ? या वहां दंगा करने के लिए आर .एस. एस.
के लोग गए थे?
अजीब विडम्बना है ,
कुछ ग़द्दारों के लियें यहाँ
इशरत "बेटी" है,
कन्हैया "बेटा" है,
दाऊद "भाई" है,
अफ़ज़ल "गुरू" है,
लेकिन,
भारत "माता" नहीं !!!
आखिर...ऐसा क्यों है........???
बौद्ध +हिन्दू =रहने में समस्या नहीं
हिन्दू + ईसाई = रहने में समस्या नहीं ,
हिन्दू + यहूदी = रहने में समस्या नहीं,
ईसाई +नास्तिक =रहने में समस्या नहीं,
नास्तिक +बौद्ध = कोई समस्या नहीं,
बौद्ध + सिख = कोई समस्या नहीं,
सिख + हिन्दू = कोई समस्या नहीं,
कन्फ्यूशियस + हिन्दू =कोई समस्या नहीं,
अब थोड़ा और ध्यान दीजिए...
मुस्लिम +हिन्दू = समस्या
मुस्लिम +बौद्ध =समस्या
मुस्लिम + ईसाई = समस्या
मुस्लिम +Jews =समस्या
मुस्लिम + सिख = समस्या
मुस्लिम + Baha'is = समस्या
मुस्लिम + नास्तिक = समस्या
मुस्लिम +Atheists =समस्या
मुस्लिम +मुस्लिम =बहुत बड़ी समस्या!
उदाहरण देखिए, जहां-जहां मुस्लिम बहुसंख्यक है, वहाँ वे सुखी नहीं रहते हैं और न दूसरे को रहने देते हैं!
देखिए ...
मुस्लिम सुखी नहीं गाजा में
मुस्लिम सुखी नहीं Egypt में
मुस्लिम सुखी नहीं लीबिया में
मुस्लिम सुखी नहीं मोरोक्को में
मुस्लिम सुखी नहीं ईरान में
मुस्लिम सुखी नहीं ईराक में
मुस्लिम सूखी नहीं यमन में
मुस्लिम सुखी नहीं अफगानिस्तान में
मुस्लिम सुखी नहीं पाकिस्तान में
मुस्लिम सुखी नहीं सीरिया में
मुस्लिम सुखी नहीं लेबनान में
मुस्लिम सुखी नहीं नाइजीरिया में
मुस्लिम सुखी नहीं केन्या में
मुस्लिम सुखी नहीं सूडान में
अब गौर कीजिए .........!
मुस्लिम सुखी वहां हैं, जहाँ कम संख्या में है...??
मुस्लिम सुखी है आस्ट्रेलिया में
मुस्लिम सुखी है इंग्लैंड में
मुस्लिम सुखी है बेल्जियम में
मुस्लिम सुखी है फ्रांस में
मुस्लिम सुखी है इटली में
मुस्लिम सुखी है जर्मनी में
मुस्लिम सुखी है स्वीडन में
मुस्लिम सुखी है U.S.A. में
मुस्लिम सुखी है कनाडा में
मुस्लिम सुखी है भारत में
मुस्लिम सुखी है नार्वे में
मुस्लिम सुखी है नेपाल में
मुसलमान हर उस देश में सुखी है !
जो इस्लामिक देश नही है ........
और देखिये कि वो उन्ही देशो को दोषी ठहराते है जो इस्लामिक नही हैं....!
या जहां मुस्लिमो की लीडरशिप नही है.....!
मुस्लिम हमेशा उन देशो को ब्लैम करते है जहा वे सुखी हैं.......!
और मुस्लिम उन देशो को बदलना चाहते है..... जहा वे सुखी हैं !
और बदल कर वे उन देशो की तरह कर देना चाहते हैं!
जहा वे सुखी नही हैं........!
और अंत तक वो इसके लिए लड़ाई करते हैं....! और इसको ही बोलते हैं........
* @्लामिक_जिहाद*
अब थोड़ा आतंकवादी संगठनो पर नजर डालिए........!
जिनके द्वारा वह दुनिया को बदलना चाहते हैं....!
1.ISIS = इस्लामी आतंकवादी संगठन ,
2.अल कायदा = आतंकवादी संगठन ,
3.तालिबान = आतंकवादी संगठन
4.हमास = आतंकवादी संगठन
5.हिज्बुल मुजाहिदीन=आतंकवादी संगठन
6.बोको हराम =आतंकवादी संगठन
7.Al-Nusra =आतंकवादी संगठन
8.अबू स्याफ = आतंकवादी संगठन
9.अल बदर = आतंकवादी संगठन
10.मुस्लिम ब्रदरहुड = आतंकवादी संगठन
11.लश्कर-ए-तैयबा = आतंकवादी संगठन 12.Palestine Liberation Front  
=आतंकवादी संगठन
13.ISLAMIC TERROR ORGANIZATION
Ansaru =आतंकवादी संगठन
14.जेमाह इस्लामिया = इस्लामी आतंकवाद
संगठन
15.अब्दुल्ला आजम ब्रिगेड = आतंकवादी
  संगठन
आदि और भी हैं ऐसे ही इस्लामिक जेहादी आतंकवादी संगठन!
अब इतना तो आप सभी, जरूर समझ गए होंगे कि......
"आतंकवादी" का "मजहब" क्या होता है.....???
अब अगर कोई हिन्दुओ को बदनाम करता है........
भगवा आतंकवाद के नाम पर, तो .......
उसे वहीं पकड़ कर ...................
ये काला चिठ्ठा अवश्य दिखाएं...........!
बस इन्ही जैसे लोगो के बल पर इस्लामिक जिहाद बढ़ता है.........!
आश्चर्य......घोर आश्चर्य.........?होता.?.....हैं

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

यह मेरी सोच है ज्यादा आपसे अपेक्षा

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मोदी जी अब जागो वीरता का प्रदर्शन दिखाओ पाकिस्तान को एक परमाणु बम से हमला करो जिससे यह दुनिया से उसका नामोनिशान मिट जाए ऐसे देश को दुनिया में रहने का कोई हक नहीं है ऐसे  ऐसा  दुनिया में रहने का कोई हक नहीं  भारत पर विश्व बिरादरी की कोई प्रतिबंध आती है हम भारतीय उसका डट के मुकाबला करेंगे और अगर जो हमें आर्थिक प्रतिबंधित किया गया तो हम कितना भी प्रतिबंध हो लेकिन विश्व बिरादरी प्रतिबंध लगाई तो  भी सामना करेंगे चाहे हमें कुछ दिन घास की रोटी खाकर भी बिताना पड़े तो हम बिता लेगें दुनिया से मिटा डालो ऐसे  दुस्टो जो  वीर सपूतों का बलिदान हर बार देखना ना पडे अच्छा नहीं लगता एक बार जो होना है हो जाने दीजिए मैं एक भारत का नागरिक होने के नाते आपसे अनुरोध करता हूं कि आप अपने असीम बल का प्रदर्शन करें और जो भी होगा वह देखा जाएगा बाद में वंदे मातरम जय हिंद जय भारत और मुझे उम्मीद है कि हमारे प्रधानमंत्री इस बार अच्छा से अच्छा काम करके दिखाएंगे  जिससे हमें अब ज्यादा इंतजार करना नहीं पड़ेगा और इन अलगाववादियों को शूट एंड साइट का सबसे पहले आर्डर दीजिए पत्थरबाजों को सूट करने का आदेश दीजिए अभी से ज्यादा और आपको क्या चाहिए यदि आप यह सब काम नहीं किया तो भारत की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी और यह आपके लिए अग्निपरीक्षा है यदि आप इस परीक्षा में पास हुये तो आप भारत में हमेसा राज करेंगे यह नहीं तो भारत देश आपको भूल जाएगा जय हिंद जय भारत वंदे मातरम हम आपके पास अब  कोई बहाना नहीं बचा है आपको या काम करना ही होगा क्योंकि भारत की जनता भी आपके साथ हैं और विपक्ष भी आपके साथ हैं सभी दल आपके साथ हैं जिस पर आपको गंभीरता से सोचने की जरूरत है यदि आप ऐसा ना कर सके तो हम सोचेंगे कि हमारे भारत के  सभी राजनीतिक दल और सभी नेता है वैसे आप भी आप कुछ अलग करके दिखाओ इसमें कोई राजनीति की कोई इ
जरूरत नहीं है जय हिंद जय भारत वंदे मातरम
हिंदी लिखने में कुछ गलती हुई हो तो क्षमा चाहते हैं यह मेरी आपसे अपेक्षा है



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बुधवार, 16 जनवरी 2019

मैंकापरस्त राजनीति इसे ही कहते है जान से मारने वाले से गठबंधन करना पडे

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पता नहीं मुलायम सिंह यादव के दिल पर आज क्या गुज़र रही होगी । गौरतलब है कि बसपा के समर्थन से जब मुलायम सिंह यादव मुख्य मंत्री बने थे तब बहुत चाहा था उन्हों ने कि मायावती उप मुख्य मंत्री बन जाएं । ताकि जैसे-तैसे वह काबू में रहें । लेकिन मायावती ने उप मुख्य मंत्री बनने से बारंबार इंकार किया । मुलायम के काबू में कभी नहीं आईं । हर बार दिल्ली से कांशीराम के साथ लखनऊ आतीं और मुलायम से मोटी रकम वसूल कर वापस हो जातीं । और जब बहुत हो गया तो मुलायम ने हाथ खड़ा कर दिया। नियमित पैसा देने से इंकार कर दिया । नाराज हो कर कांशीराम ने समर्थन वापसी के संकेत देने शुरू किए । अंतिम बातचीत के लिए कांशीराम और मायावती एक बार फिर लखनऊ आए । स्टेट गेस्ट हाऊस में ठहरे । मुलायम को बुलवाया । मुलायम पेश हुए । कमरे में दो ही कुर्सी थी । एक पर कांशीराम आसीन थे , दूसरे पर मायावती । मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव खड़े-खड़े बात करते रहे ।
जाने क्या बात हुई कि मुलायम सिंह ने बात ही बात में खड़े-खड़े अपने कान पकड़ लिए । मायावती , कांशीराम के सामने कान पकड़े खड़े मुलायम की फ़ोटो खिंचवा लिया कांशीराम ने और उसे लखनऊ के दैनिक जागरण अख़बार में छपवा दिया । कांशीराम तो दिल्ली चले गए थे पर पैसा उगाही के लिए मायावती लखनऊ में डटी रही थीं । फ़ोटो देखते ही सपा मुखिया मुलायम सहित सपा के गुंडों का खून खौल गया । मुलायम सिंह का संकेत मिलते ही सपाई गुंडों ने 2 जून , 1994 की सुबह-सुबह गेस्ट हाऊस में ठहरीं मायावती पर हमला बोल दिया । इरादा मायावती की हत्या का था । लेकिन उस समय गेस्ट हाऊस में उपस्थित भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बड़ी फुर्ती से मायावती को उन के कमरे में धकेल कर बंद कर दिया। जिसे मायावती ने भी भीतर से बंद कर लिया । मायावती के कमरे के फोन का तार काट दिया गया । पर मायावती के पास पेजर था । वह पेजर का सीमित उपयोग करती रहीं। एक दलित पुलिस अफसर विजय भूषण जो उस समय सी ओ हज़रतगंज थे , लगातार वायरलेस मेसेज करते रहे , जिसे सुनने वाला कोई नहीं था । आज के डी जी पी , उत्तर प्रदेश , ओ पी सिंह तब लखनऊ के एस एस पी हुआ करते थे , वह भी ख़ामोश थे । लेकिन मायावती का सौभाग्य था कि जब गेस्ट हाऊस पर सपाई गुंडे मायावती की हत्या के लिए हमलावर थे , ज़ी न्यूज की टीम वहीँ थी । पर इस से बेखबर सपाई गुंडे अपना काम करते रहे थे । न्यूज़ में यह घटना देखते ही उसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी ने यह मामला लोकसभा में उठा दिया । नतीज़े में मायावती को भारी सुरक्षा मिल गई थी ।
मायावती की जान बच गई थी । बसपा के समर्थन वापसी से मुलायम सरकार का पतन हो चुका था । जल्दी ही मायावती अटल जी के आशीर्वाद से उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री बन गईं । अटल जी के आशीर्वाद और भाजपा की मदद से तीन बार मुख्य मंत्री बनी मायावती को एक मौका जब मिला कि वह अटल जी के प्रति कृतज्ञता जताएं तब उन्हों ने कृतघ्नता जताई । अटल जी को लोकसभा में समर्थन देने का वादा कर के ऐन समय पर मुकर गईं । अटल जी की सरकार गिर गई थी । जीवनदान और राजनीतिक जीवनदान देने वाले अटल जी की जब मायावती नहीं हुईं तो अखिलेश यादव या किसी और की कितनी होंगी यह आने वाला समय बताएगा । रही बात अखिलेश यादव की तो वह जब अपने पिता मुलायम सिंह यादव के नहीं हुए , पिता की पीठ में छुरा घोंप दिया तो किस के होंगे भला । जो हो , अभी तो मोदी की बाढ़ में अपनी-अपनी जान बचाने के लिए गठबंधन के पेड़ पर सांप और नेवले एक साथ खड़े हैं। देखना दिलचस्प होगा कि बहता कौन है और बचता कौन है । या कि बाढ़ ही विदा हो जाती है । कौन जानता है कि कब क्या होगा । राजनीति में कब क्या हो जाए , कौन किस का हो जाए , कौन जानता है भला ।आप   का तिवारी  परिवार ने लिखा ही है :
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए ।
- 

मंगलवार, 8 जनवरी 2019

मास्टर स्टोक इसे कहते है.

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कापी की कुछ आच्छी बातें
ये घटना 2015 की है जब उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानी के चुनाव चल रहे थे...हस्तिनापुर के पास एक गुज्जर बहुल गांव में एक गुज्जर परिवार मे कुल 17 वोट थे.. अब आप सभी जानते हो कि ग्राम प्रधानी के इलेक्शन में 17 वोट बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं..इसलिए प्रधान पद का प्रत्येक उम्मीदवार उस घर को पूरी महत्त्वता दे रहा था...घर का मुखिया एक बुजुर्ग था जिसे शाम को पीने का शौक भी था
अब गांव देहात से जुड़ा हर व्यक्ति यह भी जानता है कि प्रधानी के चुनाव में शराब का बहुत बड़ा महत्त्व होता है तो इस गांव में भी शराब की दावतें खूब चल रही थी तो एक शाम एक प्रत्याशी पूरी एक पेटी शराब लेकर इस मुखिया के घर पहुंच जाता है मुखिया 17 वोट उसी प्रत्याशी को डलवाने का आश्वासन देकर वो शराब की पेटी रख लेता है....मुखिया के घर से निकलते ही इस प्रत्याशी को प्रधानी पद के दो अन्य प्रतिद्वंदी टकरा जाते हैं और पूछते हैं कि क्या तुम भी मुखिया के यहां शराब की पेटी देकर आये हो?
इस मुलाकात में भेद खुलता है कि मुखिया ने तीनो प्रत्याशीयों से वोट का आश्वासन देकर पूरी 3 पेटी शराब कब्जे में ले ली है
तीनो का पारा चढ़ जाता है कि मुखिया ने शराब की पेटी तो तीनों से ले ली...लेकिन वोट तो किसी एक को ही मिलेगी....इसका मतलब है मुखिया हममें से किन्ही दो को बेवकूफ बना रहा है
तीनो इकठ्ठे ही मुखिया के घर पर पहुंच गए और दूध का दूध और पानी का पानी करने निर्णय लिया
मुखिया के घर जाकर तीनो ने कहा कि “बाबा तुम वोट तो किसी एक को ही दोगे... लेकिन शराब की पेटी तुमने हम तीनों ने ले ली....इसका मतलब है कि तुम हमे मूर्ख बना रहे हो?...जिसको वोट देनी है उसकी पेटी रखो और बाकी दो लोगों की पेटियां वापस करो!
मुखिया ने हामी में सिर हिलाया और कहा कि...हां वोट तो किसी एक को ही दूंगा लेकिन शराब की पेटियां मैंने तुम तीनो से ली हैं...लेकिन अगर तुम तीनो अभी जानना चाहते हो कि मैं वोट किसे दूंगा तो मैं अभी इसका फैसला कर देता हूँ....तीनों प्रत्याशियों के कहा कि हां अभी बताओ
मुखिया ने अपने एक पोते को आवाज लगाकर बुलाया और अंदर कमरे में रखी तीनो शराब की पेटियां लाने को कहा
पोता..अंदर से शराब की तीन पेटियां उठाकर लाया और उनके बीच मे रख दी....मुखिया बोला “क्यों भाई... यही हैं ना तुम्हारी पेटियां"....तीनो ने सहमति में गर्दन हिलाई.....
मुखिया बोला...“अभी फैसला हो जाता है कि इस घर की 17 वोट तुम तीनों में किसको मिलेंगी....तुम तीनो में से जिसे भी लगता है कि मैं उसे वोट नही दूंगा अपनी शराब की पेटियां उठाकर ले जाये....जिसकी पेटी बचेगी....मेरे घर की 17 वोट उसकी!!”
अब मुखिया के इस मास्टर स्ट्रोक से तीनों प्रत्याशी हतप्रभ थे.... क्योंकि अब जो भी प्रत्याशी पहले शराब की पेटी उठाएगा...उसको तो वोट कतई ना मिलेगी और 17 वोट खोने को कोई तैयार नही था....तीनो एक दूसरे की शक्ल देख रहे थे कि पहले पेटी कौन उठाये....लेकिन उठाने को कोई भी तैयार नही था....बहरहाल तीनो ने कहा कि बाबा...पेटी तू ही रख और जिसे चाहे वोट कर दे
गरीब सामान्य वर्ग के लिए 10% आरक्षण देकर मोदी ने भी ऐसा ही एक मास्टर स्ट्रोक खेला है...सारी विपक्षी पार्टियां इसे चुनावी स्टंट या राजनैतिक स्टंट बताकर और इसकी घोषणा के समय को लेकर आलोचना कर रही हैं...लेकिन संसद में इस बिल का विरोध करना यह तय कर देगा...की सामान्य वर्ग का 15% वोट उस विरोधी पार्टी को तो कतई नही मिलेगा....और 15% वोटबैंक से कोई पंगा लेना नही चाहता....कांग्रेस ने मजबूरी में सही लेकिन संसद में बिल का समर्थन करने की घोषणा कर दी है केजरीवाल ने भी अनमने दिल से सही लेकिन समर्थन किया है....अभी यह पोस्ट लिखते-लिखते TV पर मायावती की प्रेस कांफ्रेंस भी देख रहा हूँ कि कैसे वह एक तरफ मोदी और भाजपा को कोस भी रही है और इस 10% आरक्षण का समर्थन भी कर रहीं है..
इन्हें न उगलते बन रहा है न निगलते.......यही है मोदी का मास्टर स्ट्रोक.....और अगले 2 महीने में आप ऐसे ही अन्य स्ट्रोक्स की उम्मीद भी कर सकते हैं.....क्योंकि मोदी ने पहले ही कहा था...की वह साढ़े चार साल केवल काम करेंगें...और कार्यकाल के अंत मे निखालिस राजनीति करेंगें।  
आप का तिवारी परिवार

बुधवार, 2 जनवरी 2019

महा कूम्भ का कुछ अंस इस परकार हैं

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*"क्यों कुंभ का मेला 12 साल में एक बार लगता है"*

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार इन्द्र देवता ने महर्षि दुर्वासा को रास्ते में मिलने पर जब प्रणाम किया तो दुर्वासाजी ने प्रसन्न होकर उन्हें अपनी माला दी, लेकिन इन्द्र ने उस माला का आदर न कर अपने ऐरावत हाथी के मस्तक पर डाल दिया। जिसने माला को सूंड से घसीटकर पैरों से कुचल डाला। इस पर दुर्वासाजी ने क्रोधित होकर इन्द्र को श्रीविहीन होने का श्राप दिया। इस घटना के बाद इन्द्र घबराए हुए ब्रह्माजी के पास गए। ब्रह्माजी ने इन्द्र को लेकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे इन्द्र की रक्षा करने की प्रार्थना की। भगवान ने कहा कि इस समय असुरों का आतंक है। इसलिए तुम उनसे संधि कर लो और देवता और असुर दोनों मिलकर समुद्र मंथन कर अमृत निकालों। जब अमृत निकलेगा तो हम तुम लोगों को अमृत बांट देंगे और असुरों को केवल श्रम ही हाथ मिलेगा।
पृथ्वी के उत्तर भाग मे हिमालय के समीप देवता और दानवों ने समुद्र का मन्थन किया। इसके लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और नागराज वासुकि को रस्सी बनाया गया। जिसके फलस्वरूप क्षीरसागर से पारिजात, ऐरावत हाथी, उश्चैश्रवा घोड़ा रम्भा कल्पबृक्ष शंख, गदा धनुष कौस्तुभमणि, चन्द्र मद कामधेनु और अमृत कलश लिए धन्वन्तरि निकलें। इस कलश के लिए असुरों और दैत्यों में संघर्ष शुरू हो गया। अमृत कलश को दैत्यों से बचाने के लिए देवराज इन्द्र के पुत्र जयंत बृहस्पति, चन्द्रमा, सूर्य और शनि की सहायता से उसे लेकर भागे। यह देखकर दैत्यों ने उनका पीछा किया। यह पीछा बारह दिनों तक होता रहा। देवता उस कलश को छिपाने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान को भागते रहे और असुर उनका पीछा करते रहे।
इस भागदौड़ में देवताओं को पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करनी पड़ी। इन बारह दिनों की भागदौड़ में देवताओं ने अमृत कलश को हरिद्वार, प्रयाग, नासिक तथा उज्जैन नामक स्थानों पर रखा। इन चारों स्थानों में रखे गए कलश से अमृत की कुछ बूंदे छलक पड़ी। अंत में कलह को शांत करने के लिए समझौता हुआ। भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर दैत्यों को भरमाए रखा और अमृत को इस प्रकार बांटा कि दैत्यों की बारी आने तक कलश रिक्त हो गया। देवताओं का एक दिन मनुष्य के एक वर्ष के बराबर माना गया है। इसलिए हर 12 वें वर्ष कुंभ की परंपरा है।
   
*जय श्रीराधे कृष्णा*

🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷आप का तिवारी परिवार

होली प्रबल होती है

*होनी बहुत बलवान है* अभिमन्यु के पुत्र ,राजा परीक्षित थे |  राजा परीक्षित के बाद उन के लड़के जनमेजय राजा बने | एक दिन जनमेजय वेदव्यास जी के ...